करनाल- केंद्रीय आवासन, ऊर्जा एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि कर्म करते हुए फल की इच्छा के बिना आगे बढ़ते रहना चाहिए। भाग्य उसी का चमकेगा जो कर्म करेगा। पवित्र मन व लोक कल्याण की भावना से किए कर्म का फल निश्चित रूप से मिलता है। उन्होंने कहा कि जीवन में श्लोकों का अध्ययन करना चाहिए। गीता के किसी भी श्लोक का एक वाक्य भी जीवन में उतार लेने से पूरी गीता का लाभ मिल सकता है, इस विचार के साथ जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री आज यहां अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर डा. मंगलसेन ऑडिटोरियम में आयोजित तीन दिवसीय जिला स्तरीय कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इससे पहले उन्होंने विभिन्न विभागों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का उद्घाटन व अवलोकन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित करके किया गया। उन्होंने कहा कि 2014 तक पहले गीता जयंती महोत्सव का स्वरूप केवल कुरुक्षेत्र तक सीमित था लेकिन उसके बाद यह प्रादेशिक, फिर राष्ट्रीय और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो गया है।
उन्होंने बताया कि 7 दिसंबर को पश्चिम बंगाल में किए जाने वाले गीता श्लोकोच्चारण कार्यक्रम में 5 लाख बच्चे भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज भी शिरकत करेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हजारों वर्ष पूर्व युद्ध के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हम धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म हमारी करेगा। पति-पत्नी, पिता-पुत्र, अध्यापक-शिष्य के संबंधों में सबका अपना-अपना धर्म है। देश की रक्षा करने वाले सैनिक और शासक का अपना धर्म है।
मनोहर लाल ने कहा कि गीता सभी के लिए उपयोगी है। गीता जीवन जीने का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद नेताओं के प्रति भी धारणा बदली है। अच्छे लोग भी राजनीति में आए हैं। उन्होंने कहा कि करनाल में सैंकड़ों संस्थाएं सेवा के कार्य में जुटी है। जीवन को सफल बनाने के लिए आचरण, संयम, शांति, स्पष्टता, धैर्य, साहस, संकल्प जैसे गुणों को अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आचरण में स्वार्थ नहीं होना चाहिए। न व्यक्ति को खुशी के पलों में अधिक खुश और न दुख की स्थिति में अधिक निराश होना चाहिए। गीता के इस संदेश को याद रखना चाहिए कि जो हुआ, अच्छा हुआ, जो होगा, अच्छा होगा।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद भगवत गीता सबके लिए है। यह भारत का गौरव है। इसमें पूरी मानवता के लिए संदेश है। गीता अर्जुन के लिए समाधान बनी, आज यह विश्व के लिए समाधान है। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम नियमित रूप से गीता पढ़ते थे। उन्होंने कहा कि बच्चों में कैसे नशे की वृतियां दूर हों, उनमें अच्छे संस्कार कैसे आएं, सकारात्मक ऊर्जा का संचार कैसे हो, इसी के निमित्त गीता महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। आज समाज में सदभावना और सामाजिक समरसता की जरूरत है। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे रात को सोने से पहले मोबाइल की आदत को छोडक़र गीता के श्लोक का उच्चारण करें।
आज पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत गीता में स्वधर्म, कर्तव्यनिष्ठ-शांति सद्भाव और स्वदेशी की प्रेरणा विषय पर सेमिनार के साथ की गई। सेमिनार में डा. भीमराव अंबेडकर अध्ययन केंद्र कुरुक्षेत्र के निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह ने गीता जयंती के अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप और गीता में स्वधर्म पर विचार रखे। सेमिनार में लोकेश मुनि, बाबा भूपेंद्र जी, संपूर्णानंद महाराज ने भी विचार रखे।
इस मौके पर आयोजित प्रदर्शनी में स्वयं सहायता समूह, सहज योग केंद्र, स्वच्छ भारत मिशन, जेल, बागवानी, जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, पीएनबी, आयुष, अक्षय ऊर्जा, समाज कल्याण, नागरिक संसाधन सूचना, वन, महिला एवं बाल विकास, कृषि, रोडवेज, हैफेड, एमएसएमई, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की ओर स्टॉल लगाए गए थे।
कार्यक्रम के पहले दिन पेंटिंग, रंगोली व क्राफ्ट की प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने पहला, दूसरा व तीसरा स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर मेयर रेणु बाला गुप्ता ने मुख्य अतिथि सहित अन्य संतों का अभिवादन व स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री के अलावा स्वामी ज्ञानानंद महाराज, लोकेश मुनि, भूपेंद्र, स्वामी पूर्णानंद, दिव्यानंद महाराज, डॉ. प्रीतम सिंह को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। ईश्वर शर्मा के नेतृत्व में लोक संपर्क विभाग के कलाकारों द्वारा धार्मिक गीतों की शानदार प्रस्तुति की गई।
























