रिपोर्ट -मैनपाल कश्यप /इंद्री- यमुना नदी में मंगलवार को अचानक तीन लाख 29 हजार क्यूसिक पानी छोड़े जाने से इंद्री उपमंडल के अनेक गांवों में खड़ी धान की फसल जलमग्न हो गयी । गांव जप्ती छपरा, कलसौरा, और आसपास के दर्जनों गांवों के खेतों में दो से तीन फीट तक पानी भर गया है, जिससे किसानों की मेहनत से तैयार जीरी (धान) की फसल पूरी तरह से बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। किसानों का कहना है कि फसलें लगभग पक चुकी थीं और कटाई की तैयारी चल रही थी, तभी भारी जलभराव ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में लंबे समय से पानी जमा है और फसलें सड़ने लगी हैं।


किसानों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि तुरंत क्षेत्र में गिरदावरी (नुकसान का सर्वे) करवाई जाए और उन्हें उनकी बर्बाद हुई फसल का उचित मुआवजा दिया जाए। पिछले कई वर्षों से लगातार मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के कारण उनकी फसलों को नुकसान हो रहा है और इस बार यमुना में आए अतिरिक्त पानी ने उनकी कमर तोड़ दी है। 2023 में आये फ्लड में भी किसानों सैकड़ों खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गयी थी।
एसडीएम अशोक मुंजाल ने बताया कि यमुना में इस समय एक लाख 60 हज़ार क्यूसिक पानी चल रहा है, हालात अभी सामान्य है l फसलों में थोड़ा पानी जरूर आया है लेकिन घरो में पानी नहीं घुसा है l जैसे ही पानी उतरेगा सरकार के निर्देश अनुसार फसलों का आकलन कराया जायेगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि ज्यादा पैनिक होने की जरुरत नहीं जो ज्यादा पानी आया था वो निकल गया है l प्रशासन की तरफ से सभी तट बन्द अच्छी तरह से लगे हुए हैं ,प्रशासन की तरफ से पूरी तैयारी है।

























