करनाल -स्वयंसेवकों की चार पीढ़ियां खपीं तब शतायु हुआ है संघ :महेंद्र सिंह

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करनाल – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 100 वर्ष का हो चुका है। 100 वर्ष की यह यात्रा संघ के लिए आसान नहीं थी। इन सौ वर्षों में संघ ने न केवल अनेक संकटों का सामना किया अपितु कई अग्नि परीक्षाएं भी दी, तब जाकर आज संघ आज अपनी स्थापना का शताब्दी उत्सव मना रहा है। किसी संगठन के लिए इतने लम्बे समय तक मुख्य धारा में बने रहना और लगातार आगे बढ़ते जाना किसी आश्चर्य से कम नहीं है। संघ को इस स्थान तक लाने के लिए कार्यकर्ताओं की चार पीढ़ियां खपीं हैं तब जाकर संघ शतायु हुआ है। संघ ने किन कठिनाइयों को झेला और इसको बड़ा करने में संघ के प्रचारकों ने किस तरह अपने जीवन को होम किया है इसका एक संस्मरण सुनाते हुए कुरुक्षेत्र विभाग सह कार्यवाहक महेंद्र सिंह ने बताया कि शुरुआती दौर में हरियाणा में संघ कार्य का विस्तार करने के लिए यूपी से एक प्रचारक सोहन सिंह करनाल में आए थे। वे सुबह शाम बच्चों के साथ शाखा लगाते और उसके बाद बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन जहां भी जगह मिलती वहीं सो जाते। एक दिन शाखा पर बच्चों के साथ खेलते हुए वे बेहोश होकर गिर गए। जब उनको डॉक्टर के पास ले जाया गया तो जांच में पता चला कि उन्होंने पिछले 7 दिन से कुछ नहीं खाया था। ऐसे समर्पित कार्यकर्ताओं के कारण ही संघ ने समाज में अपना स्थान बनाया है।
महेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज विश्व का सबसे बड़ा स्वपोषित और स्वयंसेवी संगठन है जो बिना किसी स्वार्थ के देश , धर्म और इसकी संस्कृति की रक्षा के लिए लगा है। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन को उपेक्षा,उपहास, विरोध, मौन स्वीकृति और समर्थन इन पांच चरणों से गुजरना पड़ता है। संघ इन सभी चरणों को पार कर आज समाज की अपेक्षाओं पर उतरा है। उन्होंने कहा कि संघ जो चाहता है वही समाज चाहता है और जो समाज चाहता है वही संघ चाहता है। महेंद्र सिंह ने बताया कि करनाल जिला में ऐसे अनेक परिवार हैं जिनकी तीन से चार पीढ़ियां संघ से जुड़ी हुई है। संघ को युवा बनाए रखने के लिए नौजवानों को संगठन से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए भौतिक रूप से व सोशल मीडिया के माध्यम का इस्तेमाल किया जा रहा है। बड़ी संख्या में युवा ‘जॉइन आरएसएस’ पोर्टल से जुड़े हैं। इसके अलावा बाल स्वयंसेवकों की संख्या भी संघ शाखाओं में बढ़ रही है, यही कारण है कि 100 वर्ष का होने के बावजूद संघ आज भी युवा है।
आरएसएस के सह जिला कार्यवाहक महेंद्र सिंह ने बताया कि शताब्दी वर्ष की शुरुआत विजयादशमी 2025 के अवसर पर हो चुकी है, जिसमें गणवेश में स्वयंसेवकों के मंडल, खंड/नगर स्तर के कार्यक्रम आयोजित किए गए। नवंबर से जनवरी 2026 तक तीन सप्ताह तक बड़े पैमाने पर घर-घर संपर्क अभियान की योजना बनाई गई है, जिसका विषय “हर गांव, हर बस्ती, घर-घर” होगा। संपर्क के दौरान संघ साहित्य वितरित किया जाएगा और स्थानीय इकाइयों द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सभी मंडलों और बस्तियों में हिन्दू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिसमें बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक के जीवन में एकता और सद्भाव, राष्ट्र के विकास में सभी का योगदान और पंच परिवर्तन में प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी, का संदेश दिया जाएगा।
महेंद्र सिंह ने बताया कि शताब्दी वर्ष के दौरान खंड/नगर स्तर पर सामाजिक सद्भाव बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिसमें एक साथ मिलकर रहने पर बल दिया जाएगा। इन बैठकों का उद्देश्य सांस्कृतिक आधार और हिन्दू चरित्र को खोए बिना आधुनिक जीवन जीने का संदेश देना होगा। उन्होंने महाकुम्भ का उदाहरण दिया, जहां सभी क्षेत्रों के लोग एक साथ आए थे।
 सहकार्यवाह ने कहा कि जिला स्तर पर प्रमुख नागरिक संवाद आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में राष्ट्रीय विषयों पर सही विमर्श स्थापित करने और आज प्रचलित गलत विमर्श को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
इसके अलावा युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम देश भर में आयोजित किए जाएंगे। 15 से 30 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण, सेवा गतिविधियों और पंच परिवर्तन पर केंद्रित कार्यक्रम किए जाएंगे। स्थानीय इकाइयां आवश्यकता के अनुसार कार्यक्रमों की योजना बनाएंगी।