लोक सभा चुनाव – जैसे जैसे चुनाव की तारीख नज़दीक आ रही है , जगह जगह नेताओं के साधारण और जनता के शुभचिंतक बनने के नाटक करने का जबरदस्त दौर चल रहा है l कोई चाय की दुकान पर जा रहा है तो कोई पान की दुकान पर जाकर पान खा रहा है तो किसी को गरीब के घर में नीचे बैठकर रोटी खाने में मज़ा रहा है l कोई इसे सर्कस बता रहा है तो कोई वोट लेने का नाटक बता रहा है l लोग कह रहे हैं कि इनके नाटकों को सही समझें तो ये बिलकुल हमारे जैसे ही लग रहे हैं l कोई नेता तो रोते हुए किसी को गले लगाकर ऐसा जता रहे हैं कि शायद यही तुमसे ज्यादा दुखी हो रहा है तुम्हारे दुःख में l बस वोट जरूर दे देना मुझे l लोग कह रहे हैं कि इन्होने हमारे पास केवल एक बार आना है और हमने पूरे पांच साल l पर कहा जा रहा है कि क्या ये अपनापन हमदर्दी चुनाव के बाद भी नज़र आएगी l हर नेता एड़ी चोटी का जोर लगा जीत के सपने बुन रहा है, उधर बेचारी जनता इसी उधेड़ बुन में लगी है कि क्या ये नेता जीत के बाद भी ऐसे ही रहेंगे l हालाँकि सब सच जानते हैं कि कोई कितनी ईमानदारी के साथ जनता के बीच में जाकर उनके सुख दुःख में कितना शामिल होते हैं l कई लोगों से बात करने पर एक ही बात सामने आई कि तब ये पहचानते तक नहीं केवल बेवकूफ बनाते हैं l