भविष्य में प्राकृतिक आपदा के लिए कैसे तैयार रहें, मॉकड्रिल करवाई गई

0
205

करनाल – वीरवार का दिन। समय सुबह के 10 बजे। काल्पनिक रूप में भूकम्प का केन्द्र गुरूग्राम से 25 किलोमीटर पश्चिम में था, जिसकी तीव्रता 6. 8 थी। भूकम्प से करनाल भी प्रभावित हुआ। शहर के सबसे व्यस्त और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कर्णगेट में देखते ही देखते ईमारतें ढहने लगी और उनमें मौजूद व्यक्ति मलबे के नीचे दब गए। बाजार की व्यस्तता का दृश्य एक अफरा-तफरी और भयावह मंजर में बदल गया। सब कुछ काल्पनिक था।
इसके बाद एक ऊंची आवाज में आपातकालीन सायरन बजा, जो काफी देर तक गूंजता रहा। देखते-देखते जिला प्रशासन की अग्निश्मन गाडिया, बचाव के लिए दौड़ पड़ीे और कर्ण गेट में पहुंच कर दल के सभी सदस्यों ने तुरंत अपने हैड अग्निश्मन अधिकारी से आदेश लेकर बचाव कार्य शुरू कर दिया। सीढ़ी लगाकर बिल्डिंग के मलबे में दबे, मृतकों तथा घायल व्यक्तियों को बाहर निकालने की कार्यवाही बड़ी तेजी से शुरू हो गई। इस बीच कल्पना चावला मैडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से बड़ी संख्या में एम्बुलेंस गाडिय़ां प्रभावित स्थल पर पहुंच गई। रैड क्रॉस के वालंटियर भी प्राथमिक सहायता सामग्री के साथ पहुंचे। बचाव दल के सदस्य घायलों को मलबे से निकाल-निकाल कर उन्हे कंधों पर रखकर नीचे खुली सडक़ पर ला रहे थे। स्ट्रैचर पर लिटाकर उन्हे फस्र्ट ऐड दिया जाने लगा। मृतकों व ज्यादा घायल हो चुके व्यक्तियों को एम्बुलेंस में लिटाकर अस्पताल की ओर रवाना किया जाता रहा। मलबे से घायलों को निकालने में जो बाधाएं आ रही थी, उन्हे कुदाल, कस्सी, फावड़ा व गैस कटर की मदद से हटाया गया, क्योंकि किसी की जान बचाना सबसे महत्वपूर्ण था। इस बीच पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी दृश्य को देखकर इकठ्ठी हुई भीड़ को रैस्क्यू ऑपरेशन में बाधा ना बनने के लिए समझा रहे थे।
रैस्क्यू ऑपरेशन के दौरान तमाशबीनों की भीड़ लग गई थी, लेकिन एक तरह से उनके लिए अच्छा भी था, कि किसी भी आपदा के समय तमाशबीन बनने की बजाए बचाव कार्यों में नागरिकों को भी अपना सहयोग देना चाहिए। बीच-बीच में बचाव दल के इंचार्ज एक छोटे एड्रेस सिस्टम के जरिए दुकानदारों और प्रभावित को समझाते रहे कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, प्रशासन आपकी मदद के लिए लगा हुआ है। नागरिकों से भी कहा गया कि वे शांति व्यवस्था बनाए रखें।
रैस्क्यू ऑपरेशन के चलते जिला प्रशासन के आला अधिकारी उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया और पुलिस अधीक्षक जंश्नदीप सिंह रंधावा तुरंत हुडा ग्राऊण्ड सैक्टर-12 स्थित मुख्य स्टेजिंग एरिया पहुंचे और जिला के सभी प्रभावित स्थानों के लिए बचाव टीमों को भेजने के निर्देश दिए। इसके पश्चात दोनो अधिकारी सबसे पहले कर्णगेट पर भूकम्प से प्रभावित स्थल का जायजा लेने गए। मौके पर मौजूद रैस्क्यू ऑपरेशन के इंचार्ज ने उपायुक्त को बताया कि भूकम्प के प्रभाव से 25 व्यक्तियों (काल्पनिक) की जानें और 47 घायल हुए हैं। उपायुक्त को यह भी अवगत करवाया गया कि मृतकों व घायलों को बिना किसी विलम्ब के कल्पना चावला मैडिकल अस्पताल पहुंचा दिया गया है। इस बीच हरियाणा सरकार के एक मंत्री (काल्पनिक) भी प्रभावित स्थल पर पहुंचे। उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने उन्हे भूकम्प की घटना और उससे हुए जान-माल के नुकसान की जानकारी दी।
इसके पश्चात उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक अस्पताल पहुंचे और वहां भूकम्प के प्रभाव से हुए घायलों का हालचाल जाना। उन्होने कल्पना चावाल मैडिकल कॉलेज के निदेशक को निर्देश दिए कि घायलों के उपचार में किसी तरह की कोर-कसर ना रखी जाए। दोनो अधिकारी अस्पताल के शव ग्रह भी गए, जहां मृतकों को रखा गया था। उन्होने डॉक्टरों से यह भी जानकारी ली की मरने वालों में कितने लोगों की पहचान हो चुकी है।
बता दें कि आज राज्यव्यापी मॉकड्रिल को लेकर शहर का कर्णगेट को मुख्य रूप से लिया गया था। दूसरी ओर जिला के अन्य 5 जगहों जिनमें शहर के सुपरमॉल सैक्टर-12, कल्पना चावला राजकीय मैडिकल कॉलेज, इन्द्री स्थित डब्ल्यू.जे.सी. पुल का स्थल, असंध के जयसिंहपुरा स्थित आई.टी.आई. तथा इण्डेन बॉटलिंग प्लांट में भी पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार मॉकड्रिल सम्पन्न करवाई गई। इसके पश्चात सैक्टर-12 स्थित हुडा ग्राउण्ड में बनाए गए स्टेजिंग एरिया में उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति में आज की मॉकड्रिल में शामिल अधिकारियों ने अपने-अपने प्रबंधों, की गई कार्यवाही तथा अनुभव शेयर किए।
उपायुक्त ने आज की मॉकड्रिल को सफलतापूर्वक सम्पन्न करवाने के लिए सभी अधिकारियों द्वारा की गई कार्यवाही की सराहना की और धन्यवाद किया। उन्होने कुछ जरूरी बाते भी बताई और कहा कि भूकम्प जैसी आपदा के समय संचार सिस्टम फेल हो जाता है, मोबाईल नहीं चलते। ऐसे समय में वायरलेस व वाकीटॉकी सैट से कम्यूनिकेशन करते रहना चाहिए। उन्होने अधिकारियों से कहा कि यदि भविष्य में प्राकृतिक आपदा आ जाए, तो सभी तुरंत स्टेजिंग एरिया में पहुंचना सुनिश्चित करें। गौर हो कि मॉकड्रिल के रिस्पोनसिबल ऑफिसर उपायुक्त थे, जबकि कमांडिंग ऑफिसर ए.डी.सी. को बनाया गया था। पुलिस अधीक्षक सुरक्षा प्रबंधों के इंचार्ज थे।