

कार्यक्रम में किशोरी विकास प्रकल्प की प्रीति कुकरेजा और सेवा भारती की प्रान्त कार्यकारिणी सदस्य सरोज चावला ने बताया क़ि तीज उत्सव की यह परंपरा मां पार्वती द्वारा भगवान शिव को पुनः प्राप्त करने की कथा पर आधारित है। विवाहित महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र और सौभाग्य की कामना के लिए व्रत करती हैं। अंगूरी देवी ने ढोलक बजाकर शिव पार्वती का भजन गया फिर सबने तीज के गीत गाकर माहौल को उत्सवमय बना दिया l झूला तो पड गए अम्बुआ की डाल पे जी , हरी ते चूड़ी रे ननदी न पहनूं पर रीति, कीर्ति, मनदीप और पिंकी तीज के गीतों पर खूब जमकर नाची l
भारत विकास परिषद् की राधा कृष्ण शाखा के सदस्यों ने बताया कि हमें इस त्यौहार को पारम्परिक तरीके से मनाना चाहिए l पहले तो इस त्यौहार के आने से पहले ही गली ,मोहल्लों में झूले डले देखकर पता चल जाता था कि तीज का
त्यौहार आने वाला है सब मिलकर झूला झूलते थे तीज के गीत गाते थे l परन्तु अब ये पारम्परिक तरीके कहीं खो से गए है और क्लबों ,होटलों में केवल सिंबल के तौर पर मनाये जाने लगे हैं लेकिन हमें अपनी परम्परा को बनाये रखना चाहिए l
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