करनाल- कृषि तथा किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि जिला में गेहूं के फसल अवशेष जलाने के अभी तक 172 मामले सामने आये हैं। गाँव स्तरीय कमेटी/एनफोर्समेंट टीम द्वारा जांच उपरांत 130 मामले एक्सीडेंटल (शॉर्ट सर्किट या अज्ञात कारणों) से पाए गए, 24 घटनाओं में आगजनी नहीं पाई गई, 2 घटनाएं जंगलात क्षेत्र में मिलीं, 7 मामलों में अभी जांच जारी है व शेष 9 मामलों में जानबूझकर आग लगाई गई है, जिन पर कार्यवाही करते हुए सभी 7 किसानों पर गेहूं के फसल अवशेष जलाने पर वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत धारा 39 व भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 (ए) के अंतर्गत सम्बंधित थाना में मुकदमा दर्ज करवाया जा चुका है। इनमें से पांच किसान जिला करनाल के असंध खंड व दो-दो किसान खंड घरौंडा व निसिंग से सम्बंधित हैं। साथ ही इन सभी किसानों पर नियमानुसार 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है और सभी किसानों के मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल रिकॉर्ड में 172 रेड एंट्री कर दी गयी हैं जिससे ये किसान अगले दो सीजन अपनी फसल एमएसपी पर नहीं बेच पायेंगे।
डीसी डॉ. आनंद कुमार शर्मा बुधवार को लघु सचिवालय के सभागार में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की रोकथाम को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए । इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष द्वारा इस संबंध में पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश में स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में डीसी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि गेहूं की फसल के अवशेष जलाने वालों पर जुर्माने के साथ-साथ एफआईआर दर्ज कराएं। तहसीलदार और बीडीपीओ किसानों को जागरूक करने के लिए गांवों में मुनादी कराएं। संबंधित एसडीएम आग की घटना सामने आने पर टीम के साथ मौके का दौरा करें और कारणों का पता लगाकर उचित कदम उठाएं।






















