विशेष – जंतर-मंतर पर परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन शुरू हुआ लेकिन जैसे जैसे भांति भांति के लोग आते गए यह प्रदर्शन देश विरोधी आंदोलन में तब्दील होता गया , इस मंच को हर देश विरोधी ने अपने एजेंडे के लिए इस्तेमाल किया क्योंकि इसमें अराजक तत्वों की एंट्री हो चुकी थी l हालाँकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है , इसके बाद बीजेपी के कार्यकर्त्ता मायूस हैं कि यही करना था तो पहले ही कर लेते कि ऐसे तो हर दिन जंतर मंतर इस्तीफे और उपद्रव का मंच बन जायेगा , रोज़ सरकार ब्लैकमेल होने लगेगी l इतनी भीड़ और ऐसे तत्व वहां तक इतनी आसानी से पहुंचे कैसे यह भी एक गंभीर सवाल है l लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग का यह प्रदर्शन अपने असली मकसद की बजाय राजनीति चमकाने और अराजकता फ़ैलाने का अड्डा बन गया और बची कसर सोशल मीडिया के रीलबाज़ों ने इसे नाम कमाने का स्टूडियो बनाकर पूरी कर दी l
यही सवाल अब इस पूरे आंदोलन के केंद्र में है। देखा जा रहा है कि यहां लोगों ने भड़ास निकालने का अड्डा ज्यादा बना लिया ,इसलिए असल मुद्दों से, बदलाव की बात से भटक गए हैं। किसी भी प्रकार की आस-उम्मीद खो चुके हाशिये पर पहुंचे हुए राजनीतिक दल को घर बैठे-बिठाए बढ़िया मुद्दा मिल गया ,क्योंकि हर कोई अपने आने वाले चुनाव में इतनी आसानी से आये मुद्दे को भला कैसे जाने देगा भले ही उसको असामाजिक तत्वों का साथ देना पड़े जैसा की दिख भी रहा है l इसीलिए सब इकट्ठा हुए लोग सिर्फ इस्तीफा लेने पर ही अडि़ग हो गए ,चाहे शिक्षा सुधार की मांग पर सरकार ने सख्त नियम भी बना दिए हो उधर ध्यान ही नहीं है जहां से प्रदर्शन शुरू हुआ था l प्रधानममंत्री जैसे सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति को भी अपशब्द कहने की होड़ लगी थी क्या ऐसा किसी दूसरे देश में संभव था l
एक राष्ट्रीय चैनल के मुताबिक दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान यहां रील बनाने का रोजगार भी चल रहा है , कई सोशल मीडिया इस संवेदनशील धरने-प्रदर्शन का इस्तेमाल अपनी पहुँच बढ़ाने, और रातों-रात अधिक मशहूरी पाने के लिए कर रहे हैं। कई लोग केवल सोशल मीडिया पर रील बनाने, लोकप्रियता हासिल करने और अपनी दुकान चमकाने पहुंचे हुए हैं , जैसा कि पिछले आंदलनों में भी देखने को मिला लेकिन अब आये दिन इनकी संख्या जंगली घास की तरह रोज़ बढ़ रही है l जब ऐसा होगा तो धरने-प्रदर्शन कंटेंट और तमाशा बनने लगते हैं, तो असली मांगें तो पीछे छूट जाती हैं और यह सिर्फ एक मीडिया इवेंट या ट्रेंड बनकर रह जाता हैं l जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शनों में सोशल मीडिया का उपयोग एजेंडा चलाने, रील व प्रचार के लिए पैसे ऑफर किए जाने के दावे, और पाकिस्तान से संचालित सैकड़ों फर्जी हैंडल द्वारा भ्रम फैलाने के मामले भी सामने आए हैं , ऐसे सोशल मीडिया हैंडल की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया है जो इस प्रदर्शन की आड़ में नफरत, फर्जी खबरें और हिंसा फैलाने का प्रयास कर रहे थे। इसी तरह बाहर के कुछ देशों पाकिस्तान , बांग्लादेश , अमरीका से ऑनलाइन फ़ास्ट फ़ूड और फलों की डिलीवरी भी की जा रही है तो इस से क्या समझ में आता है l
जंतर मंतर पर ऐसे हालात के बाद डीयू और जेएनयू ने अपने छात्रों के लिए जंतर मंतर से दूर रहने की अडवाइज़री जारी कर दी है l जंतर मंतर पर दिल्ली पुलिस फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों का उपयोग कर रही है। पुलिस के अनुसार, इन कैमरों का उद्देश्य आम और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की पहचान करना नहीं, बल्कि भीड़ में छिपे वांछित अपराधियों, फरार लोगों, हिस्ट्रीशीटरों और असामाजिक तत्वों की पहचान करना है। जंतर मंतर पर हुए इस उपद्रव के दौरान दिल्ली पुलिस ने 2500 ऐसे लोगों की पहचान की है जिनका क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है l अब आती है बात सरकार के द्वारा जंतर मंतर उपद्रव मामले में केस दर्ज न करने की बात की ऐसा फैसला किसी भी देश के जिम्मेदार नागरिक को पसंद नहीं है यह गलत फैसला है ऐसे तो उपद्रवियों के हौसले और बुलंद होंगे देश समाज का नुकसान होगा l हर पिछले आंदोलनों में भी ऐसा ही हुआ है जो गलत है फिर कानून व्यवस्था की बात कहाँ रह गई l


























