करनाल -वर्क फ्रॉम होम के नाम पर ठगी करने वाला तीसरा आरोपी भी गिरफ्तार

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करनाल – साइबर क्राइम पुलिस टीम द्वारा वर्क फ्रॉम होम की नौकरी देने के नाम पर लोगों के साथ लाखों रुपये की ठगी की वारदातों को अंजाम देने के मामले में तीसरे आरोपी को गिरफ्तार किया है।  एक महिला की शिकायत पर थाना साइबर क्राइम में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। उस महिला ने बताया था कि अज्ञात आरोपियों ने घर बैठे नौकरी करने के नाम पर अलग-अलग समय पर अलग-अलग चार्जेस के नाम के 3,41,881 रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवा लिए थे और उसके काम के बदले उसे कोई भी पैसे वापस नहीं किये गये। जिसके बाद महिला को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला तो महिला ने साइबर थाना में शिकायत दी। इस संबंध में साइबर  थाना में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120बी आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया है ।

पुलिस ने दो आरोपियों मुकेश कुमार जिला सीतामढी बिहार हाल प्रशांत गार्डन खोडा कालोनी जिला गाजियाबाद उत्तर प्रदेश , जतिन धूमीमल चावडी बाजार थाना हौज काजी सेंट्रल दिल्ली को दिल्ली से अलग-अलग जगह से गिरफ्तार किया गया और पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई तो आरोपियों द्वारा अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देने की बात का खुलासा किया गया। जिसमें एक आरोपी सुजीत कुमार सिंह पूर्वी चम्पारण बिहार हाल 965 प्रशांत गार्डन खोडा कालोनी जिला गाजियाबाद का भी था। जिसे  कल गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया। आरोपी से पूछताछ में जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी पूर्व गिरफ्तार आरोपियों के साथ पहले एक कॉल सेंटर में काम करता था। वंही से आरोपियों की आपस में जान पहचान शुरू हुई थी। आरोपी सुजीत एक अन्य व्यक्ति से सस्ते दाम पर फर्जी सिम और फर्जी पेटीएम खाते खरीदकर आरोपियों को और महंगे दाम पर बेचता था। आरोपी को आज पेश अदालत करके न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

पूरी जांच में खुलासा हुआ कि खुलासा हुआ कि आरोपियों ने वर्ष 2019 में सेक्टर-62 नोएडा की एक बिल्डिंग में एक्सिस डाटा का दफ्तर खोला था। उस धोखाधडी करने के लिए उस दफ्तर का फर्जी पता बेंगलुरु कर्नाटक का दिया गया था। उस दफ्तर में बैठ कर आरोपी क्वीकर वेबसाइट से ऑनलाइन जॉब करने के इच्छुक लोगों का डाटा खरीद लेते थे। डाटा खरीदने के बाद उन्हें धोखाधडी करने के लिए फर्जी मोबाइल नम्बर व रुपये प्राप्त करने के लिए पेटीएम खातों व अन्य बैंक खातों की जरूरत होती थी। आरोपियों ने अपने दफ्तर में एक्सिस बैंक के फर्जी रजिस्ट्रेशन फॉर्म, फर्जी एनओसी, फर्जी जॉब एग्रीमेंट लेटर आदि तैयार करने के लिए एक कम्प्यूटर भी रखा हुआ था। आरोपियों ने फर्जी कॉल करने के लिए की-पैड वाले मोबाइल फोन व खातों में रुपये ट्रांसफर करने के लिए एक स्मार्ट फोन भी रखा हुआ था। आरोपी इन मोबाइल फोन का प्रयोग केवल जिन लोगों से धोखाधडी करनी होती थी, के लिए रखते थे। आरोपी बैंक खातों की केवाईसी करने के बहाने लोगों से उनके पैन कार्ड व आधार कार्ड भी प्राप्त कर लेते थे जिसकी वजह से आरोपी बैंक में उनके नाम से फर्जी बैंक खाते खोल लेते थे। इसके बाद आरोपी ऐसे लोग जो घर बैठे कोई ऑनलाइन काम करने के इच्छुक होते थे, क्वीकर से ऐसे लोगों को डाटा खरीद लेते थे। आरोपी इस डाटा में से भी ज्यादातर महिलाओं को निशाना बनाते थे। आरोपी पहले ऐसी महिलाओं को 15 दिन के लिए किसी प्रकार के फार्म भरने का काम दे देते थे। फिर 15 दिन बाद उसी महिला के पास उसकी पेमेंट करने के नाम पर फोन करते थे। उस महिला को विश्वास में लेकर आरोपी कई प्रकार के चार्ज जैसे- रजिस्ट्रेशन चार्ज, एनओसी चार्ज, जीएसटी, अपग्रेडेशन चार्ज व अन्य कई प्रकार के चार्ज के नाम पर रुपये वसूलते थे। जब कोई महिला इनके पास रुपये भेजती रहती थी तो आरोपी उस महिला से मोटी रकम की मांग करने लग जाते थे। आरोपियों से यह भी खुलासा हुआ कि आरोपियों द्वारा अब तक पूरे देश में करीब 100 लोगों के साथ इस प्रकार की ठगी को अंजाम दिया जा चुका है और लाखों रुपये की धोखाधड़ी कर चुके हैं।