करनाल – सेवा भारती ने करनाल में एक कमरे से सेवा और स्वावलंबन का सफर 40 साल पहले शुरू किया था। अपने कार्यों के चलते आज यह संस्था वट वृक्ष का रूप ले चुकी है जहां पर सिलाई, रूप सज्जा केंद्र, मेहंदी से लेकर कंप्यूटर, धार्मिक, सांस्कृतिक और बच्चों के छात्रावास, फिजियोथैरेपी, स्वदेशी लड़ियां और गौ सेवा उत्पाद जैसे प्रकल्प चलाए जा रहे हैं। यह जानकारी सेवा भारती के प्रांत उपाध्यक्ष रोशन लाल गुप्ता ने दी।
आज सेवा भारती परिसर में सेवा दर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसकी शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ की गई। इस अवसर पर सेवा भारती के पदाधिकारियों के साथ-साथ प्रबुद्धजन भी मौजूद रहे। इस अवसर पर सभी प्रबुद्धजनों को सेवा भारती द्वारा चलाए जा रहे स्वावलंबी प्रकल्प स्वरोजगार, शिक्षा, छात्रावास चिकित्सा जैसे सेवा कार्यों का अवलोकन भी कराया गया।

कार्यक्रम के दौरान रोशन लाल गुप्ता ने बताया कि सेवा भारती ने 40 साल पहले सिलाई प्रशिक्षण का प्रकल्प शुरू किया था। 1 वर्ष में दो समूह निकलते हैं। प्रत्येक समूह में 40 छात्राएं होती हैं। इस प्रकार से लगभग 32 हजार से ज्यादा महिलाएं सिलाई का प्रशिक्षण पाकर आत्मनिर्भर जीवन जी रही है। सेवा भारती द्वारा विशेषकर सेवा बस्तियों की महिलाओं को भी स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षित किया जाता है। संस्था में 5 साल पहले चाइनीज लड़ियों को टक्कर देने के लिए स्वदेशी लड़ियों के निर्माण का कार्य आरंभ किया गया था जिससे आज सैकड़ो महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ी हुई है। यहां बनी लड़ियाँ अयोध्या स्थित राम मंदिर की शोभा भी बढाती हैं। करनाल में बनी लड़ियाँ हरियाणा ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न भागों में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यह लड़ियाँ विदेश में भी स्वदेशी की पहचान बन गई हैं। गुप्ता ने बताया की सेवा भारती ने अन्य प्रकल्पों में मेहंदी व रूप सज्जा केंद्र प्रशिक्षण का भी प्रकल्प शुरू किया है। अब सेवा भारती में प्रशिक्षित महिलाएं करवा चौथ, रक्षाबंधन, तीज सहित विभिन्न त्योहारों पर महिलाओं को मेहंदी लगाती हैं। इसके साथ ही कंप्यूटर प्रशिक्षण का भी यहां केंद्र चल रहा है। प्रशिक्षण लेकर महिलाओं ने अपने कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र खोले हुए हैं, इसके अलावा कई महिलाएं अटल सेवा केंद्र भी चला रही हैं। रोशन लाल ने बताया कि संस्था के परिसर में जरूरतमंद और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए निशुल्क छात्रावास चलाया जा रहा है जहां बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि यहां पर उत्तर भारत का पहला अपनी तरह का अनूठा भारत माता मंदिर भी मौजूद है। यहां धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि यहां 40 वर्ष पहले केवल एक कमरे से सेवा भारती की शुरुआत की गई थी लेकिन आज तीन तल का आलीशान भवन है जहां विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाती हैं। यहां बहुउद्देशीय सभागार के साथ-साथ पुस्तकालय और बैठक कक्ष भी है। संस्था के उपाध्यक्ष ने बताया कि गौ संरक्षण के लिए यहां गौमय प्रकल्प शुरू किया गया है जहां गौमय उत्पाद का प्रशिक्षण दिया जाता है। नागपुर और जगाधरी से विशेष प्रशिक्षक महिलाओं को को गोमय उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देते हैं।
इस मौके पर सेवा भारती से राममेहर, परमाल, संजय पांडे, पूनम पांचाल, विपिन अरोड़ा, रामफल ,भूषण गोयल, ऋषिपाल हेमदा व महिपाल, राजेन्द्र कुमार सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।























