करनाल – गाड़ी लेने से पहले पार्किंग की जगह अप्रूव करानी जरुरी

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नो पार्किंग नो कार – हर किसी की इच्छा होती है कि उसके पास कार जरूर होनी चाहिए , भले ही पार्किंग की जगह न हो उसके लिए सड़क तो है न  l लेकिन अब ये सब यहाँ भी दूर राज्यों की तरह बदलने जा रहा है l सबको गाड़ी खरीदने से पहले उसके पार्किंग के लिए जगह दिखानी जरुरी होगी वह सड़क पर गाड़ी खड़ी नहीं कर सकेगा अब इसके लिए सब जगह  नियम और कानून जारी होने जा रहा है l गाड़ी तो ले ली पर खड़ी करने की जगह नही है उसे आये दिन किसी की दुकान या घर के बाहर खड़ी कर देते है जिसको लेकर आये दिन झगडे बढ़ रहे हैं l 

देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने आज  सेक्टर-43 चंडीगढ़ में मल्टी लेवल पार्किंग का उद्घाटन करते समय भी इस विकराल समस्या का जिक्र किया और कहा कि यदि कोई वकील अदालत पहुंचने से पहले ही पार्किंग के लिए संघर्ष करता रहे तो उसका ध्यान मुकदमे की पैरवी से भटक जाता है।


 ट्रैफिक और सड़कों पर जाम को रोकने के लिए  राज्य सरकारों और प्रशासन को जद्दोजहद करनी पड़ती है और ये समस्या अब महासमस्या  बन गई है , तो अब “नो पार्किंग नो कार” का नियम लागू होने जा रहा है। इसके तहत कार खरीदने पर आपके पास पार्किंग होना जरुरी है l  जैसे महाराष्ट्र , तमिलनाडू की राजधानी  चेन्नई  में राज्य सरकार ने नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के लिए पार्किंग का प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया है। मुंबई, पुणे, ठाणे और नागपुर जैसे शहरों में बिना पार्किंग के नई कार का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। दिल्ली सहित अन्य महानगरों में भी इस तरह के सख्त पार्किंग एरिया मैनेजमेंट प्लान का प्रस्ताव रखा गया था।

पर्यावरण भले ही कितना भी खराब हो लेकिन भारत में प्रतिदिन वाहनों की बिक्री काफी तेजी से बढ़ रही है। इंडस्ट्री के आंकड़ों  के अनुसार, भारतीय बाजार में हर मिनट लगभग 54 गाड़ियां (सभी प्रकार के वाहन) बिकती हैं और त्योहारों  में यह आंकड़ा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।  

वाहनों की बढ़ती संख्या से अब हर गांव या शहर की गली, सड़कें अब पार्किंग में बदल गईं हैं , हर जगह पार्किंग से अटी पड़ी है l आमतौर पर  सबने यह नोट किया ही होगा कि जहाँ लोग आराम से सुबह-शाम सैर के लिए निकलते थे, वहां आज गाड़ियों की सटी हुई कतारें लगी रहती हैं। फुटपाथ पर पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है और यहाँ तक कि जाम में एम्बुलेंस के लिए गुजरने की जगह नहीं बचती है।

अक्सर वाहनों का सड़क पर गलत तरीके से खड़ा होना, गाड़ी को पड़ोसी के घर के आगे खड़ी करना जैसे विषय ही आपसी झगड़ों का मुख्य कारण बन रहे हैं । आमतौर पर ये झगडे पहले मामूली बहस से शुरू होते फिर हाथापाई, लाठी-डंडों, और कभी-कभी गोलीबारी या हत्या तक पहुंच जाते हैं । ऐसे ही हिंसक हादसों की खबरें हर जगह सुनी और देखी जाती हैं।  मामलों के विशेषज्ञों  का मानना है कि वाहनों की बढ़ती संख्या और सीमित जगह के कारण यह घटनाएं रोज़ बढ़ रही हैं l अधिकतर लोगों का मानना है कि ऐसा नियम और क़ानून जल्दी आना चाहिए ताकि इस महा समस्या का समाधान हो l