रिपोर्ट -मैनपाल कश्यप /करनाल- करनाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक सब इंस्पेक्टर को 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है । आरोपी कुंजपुरा सेंटर पर तैनात था और घरौंडा व निसिंग सेंटर का अतिरिक्त चार्ज भी संभाल रहा था। विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और कई अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

जानकारी के अनुसार आरोपी सब इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने कुछ दिन पहले एक डिपो की जांच की थी, जहां करीब 4 किलो अनाज कम मिला था। शिकायतकर्ता डिपो होल्डर विकास का आरोप है कि मामूली कमी को बहाना बनाकर सब इंस्पेक्टर उस पर दबाव बना रहा था और रिपोर्ट में कई क्विंटल गेहूं कम दिखाने की धमकी दे रहा था। मामले को दबाने और रिपोर्ट सही दिखाने के बदले आरोपी ने 15 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। बताया जा रहा है कि आरोपी मनोज कुमार मूल रूप से मधुबन का रहने वाला है और रिटायर्ड फौजी भी है। मनोज कुमार को बीती 30 अप्रैल को ही डीएफएससी कार्यालय द्वारा कुंजपुरा सेंटर पर तैनात किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी ने डिपो होल्डर से साफ कहा था कि मामला निपटाना है तो पैसे देने होंगे।
पीड़ित डिपो होल्डर विकास रिश्वत नहीं देना चाहता था, जिसके बाद उसने स्टेट विजिलेंस से संपर्क कर पूरी शिकायत दी। शिकायत मिलने के बाद कुरुक्षेत्र एसीबी टीम की इंस्पेक्टर नन्ही देवी के नेतृत्व में ट्रैप लगाया गया। टीम ने 15 हजार रुपए के नोटों पर केमिकल पाउडर लगाया और पूरी योजना के तहत शिकायतकर्ता को रकम सौंप दी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोपी सब इंस्पेक्टर को फोन कर पैसे देने की बात कही। आरोपी ने उसे कुंजपुरा बस अड्डे के पास बुलाया, जहां पहले से ही विजिलेंस टीम सादी वर्दी में तैनात थी।
जैसे ही आरोपी सब इंस्पेक्टर ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम ली, विजिलेंस टीम ने तुरंत उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद आरोपी को करनाल एसीबी कार्यालय ले जाया गया, जहां उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। एसीबी इंस्पेक्टर नन्ही देवी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ शिकायत मिली थी कि वह डिपो होल्डर्स से राशन वितरण और जांच के नाम पर अवैध वसूली करता था। फिलहाल आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है और यह भी जांच हो रही है कि इस पूरे खेल में विभाग का कोई अन्य अधिकारी या कर्मचारी शामिल तो नहीं।
























