करनाल – जब हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी तब भी हरियाणा के हकों व किसान, मजदूर, कमेरे वर्ग की आवाज़ हमेशा से ही रणदीप सुरजेवाला ने उठाई है और आज भी मुश्किल की इस घड़ी में सुरजेवाला ने हरियाणा में अलग अलग हिस्सों में रैलियाँ करके कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने और कांग्रेस का ग्राफ बढाने में अपनी अहम् भागेदारी पेश कर रहे हैं। पूर्व विधायक राजकुमार वाल्मीकि ने रणदीप सुरजेवाला को भावी सीएम बताते हुए कहा कि गरीबों, मजदूरों और कमरे वर्गों को केवल और केवल रणदीप सुरजेवाला हक़ दिलवा सकते हैं। मुख्यातिथि रणदीप सुरजेवाला ने आज इस दलित महासम्मलेन में बुलाए जाने पर पूर्व विधायक राजकुमार वाल्मीकि का धन्यवाद करते हुए कहा कि आज दलित समाज के साथ साथ हर वर्ग को एकजुट होकर मोदी व खट्टर सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है। आज करनाल की कालिदास रंगशाला, कर्ण स्टेडियम में पूर्व विधायक राजकुमार वाल्मीकि की अध्यक्षता में दलित महासम्मेलन का आयोजन किया गया।
क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री खट्टर के शासनकाल में गरीब समाज को आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपेक्षा का शिकार होना पड़ा है। भाजपा सरकार का दमनकारी चक्र गरीब समाज के गले की फांस बन चुका है। 70 साल पहले जब पंडित नेहरू, महात्मा गाँधी, सरदार पटेल और बाबा साहेब अम्बेडकर ने मिलकर गरीबों को सबके बराबर करने का जो आरक्षण के मुहिम की शुरुआत की थी आज उस गरीबों के आरक्षण को भाजपा सरकार ख़त्म करने की तैयारी कर रही है। यह सब आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत व संघ सरचालक मनमोहन वैद्द के आरक्षण पर पुनर्विचार करने तथा ख़त्म करने के बयानों से स्पष्ट है। जहाँ राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी गरीबों के अधिकारों के प्रति वचनबद्ध है दलित समाज को भी इस बारे आगाह रहना होगा। कांग्रेस के शासनकाल 2010 में गरीबों के लिए शुरू किया गया एससी सबप्लान को भी भाजपा सरकार ने ख़त्म करने के निर्णय को एक बड़ी साजिश को अंजाम दिया है। यह कदम गरीबों व दलितों की सरकारों के बजट में सीधे सीधे हिस्सेदारी को ख़त्म करना है। इसका सीधा प्रभाव सरकारी खजाने में गरीब की हिस्सेदारी पर पड़ेगा।
भारत में गरीबों की 16.6 प्रतिशत आबादी का हवाला देते हुए सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार ने अपने आखरी बजट 2017-18 में गरीबों की आबादी के अनूकुल बजट ना देकर महज 5.5 प्रतिशत पैसा आबंटित किया गया मतलब साफ है कि गरीबों का 11.1 प्रतिशत पैसा केंद्र की भाजपा सरकार डकार गई। कांग्रेस के शासनकाल में गरीबों के कल्याण के लिए चलने वाली 294 स्कीमों को भी मोदी सरकार ने कम करते हुए 256 स्कीम पर लाकर खड़ा कर दिया है। सुरजेवाला ने मोदी सरकार के क्रेडिट गारंटी स्कीम के वादे पर प्रहार करते हुए कहा कि साल 2016-17 के बजट में क्रेडिट गारंटी स्कीम में मात्र 10 करोड़ रु दिए और उस बजट का आज तक भी एक पैसा खर्च नही किया गया और साल 2017-18 के बजट में केवल 1 लाख रु देकर गरीबों के विश्वास के साथ खिलवाड़ किया है मोदी सरकार ने। दलितों की घटती नौकरियों व बैकलाग पर चिंता व्यक्त करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार ने सरकारी नौकरियों में दलितों की हिस्सेदारी लगभग ख़त्म कर दी है। साल 2013 में 92 हजार 928 दलित साथियों को कांग्रेस सरकार में नौकरियां मिली। परन्तु साल2015 में दलितों को मिलने वाली नौकरियां घटकर मात्र 8,436 रह गई और खट्टर सरकार ने भी अपने 4 साल के कार्यकाल में महज 7 हजार नौकरियां दी है। आज भी देश के अंदर लगभग 31 प्रतिशत के साथ 28,713 पद गरीबों के खाली पड़े हैं। इसी प्रकार दलितों की “प्रीमैट्रिक स्कोलार्शीप योजना” का बजट कांग्रेस शासनकाल 2013-14 में 882 करोड़ रु से घटाकर 2017-18 में मात्र 50 करोड़ रु कर दिया है मतलब साफ है बजट के 832 करोड़ रुपए मोदी सरकार हजम कर गई और इससे भी चोंकाने वाली बात यह है कि भारत सरकार की मैला साफ़ करने वाले व्यक्तियों की “पुनर्वास व रोजगार योजना” में कांग्रेस ने 439 करोड़ रु का बजट दिया लेकिन मोदी सरकार ने साल 2017-18 के बजट में मात्र 5 करोड़ और साल 2018-19 के बजट में मात्र 20 करोड़ दिए लेकिन एक फूटी कौड़ी को भी खर्च नहीं किया गया। हर नौंवे मिनट एक दलित साथी पर अत्याचार हो रहा है और भाजपा सरकार मूकदर्शक बनी बैठी हुई है।
एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए सुरजेवाला ने कहा कि दलित अत्यचार की घटनाएं साल 2013 में 39,408 से बढ़कर साल 2015 में 45,003 हो गई और साल 2016 में एक अनुमान के मुताबिक़ इनकी संख्या 60,000 हो गई है यानि के भाजपा सरकार के तानाशाही रवैये के कारण दलित अत्याचार की घटनाए दुगुनी हो गई है।मोदी सरकार और खट्टर सरकार के शासनकाल में दिन प्रतिदिन हो रहे अत्याचार और घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि हैदराबाद में छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या, गुजरात के ऊना में उधेड़ी गई दलितों की चमड़ी, राजस्थान में डेल्टा मेघवाल की बलात्कार के बाद हत्या, महाराष्ट्र में 21 साल के दलित की गाड़ी से कुचलकर हत्या, सहारनपुर में दलितों के मकान को जलाया जाने पर भी आज तक किसी भी दोषी पर कोई कार्रवाई नही की मोदी सरकार ने।
ठीक इसी तरह हरियाणा की खट्टर सरकार द्वारा भी दलितों पर आए दिन बढ़ रहे अत्याचार खट्टर सरकार का दलित विरोधी चेहरे को बेनकाब करती है। 28 नवम्बर 2015 को भाजपा के मँत्री द्वारा किया गया अपमान ये दर्शाता है कि एक महिला आईपीएस जो जाति से एक दलित हैं जिनका ये अपराध था कि उन्होने शराब की तस्करी करने वालों का विरोध किया था। इसी तरह का वाक्य करनाल में वाल्मीकि समाज की एक बेटी के साथ हुआ जो इंजीनियर के पद पर नौकरी कर रही थी उनका ये कसूर था कि उन्होने अपने अधिकारी द्वारा जातिसूचक शब्द का विरोध करने की सजा खट्टर सरकार ने नौकरी से बर्खास्त करके दी जो आज न्याय पाने के लिए कोर्ट के चक्कर काट रही है। फरीदाबाद में दलित के बच्चों को जिंदा जला दिया जाता है लेकिन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर इसके विपरीत वीके सिंह द्वारा उन बच्चों की तुलना कुत्तों के पिल्लों से करना भाजपा के चाल, चरित्र और चेहरे को बेनकाब करता है। जब ऐसे तानाशाही रवैये की सरकार में स्वाभिमान, अधिकार सुरक्षित ना हो तो उस सरकार के खिलाफ अलख जगाने और आंदोलन करने की जरूरत है।इस अवसर पर हरियाणा महिला कांग्रेस सुमित्रा चौहान, विरेंद्र शाह, रमेश गुप्ता , सुरेश गुप्ता,भूपेन्द्र फौगाट,ईश्वर नैन, नाहर सिंह सन्धु ,फूल सिंह खेडी,संजय छोकर, रंजीता मेहता, नीतू गिल रतिया, विद्या रानी दनौदा, अमन चीमा, शालिनी मेहता, सुरेश यूनिसपुर,साहिब सिंह मर्दानखेडा,रमेश चौधरी,राजेश चौधरी, आदि मौजूद रहे।






















