रिपोर्ट -कांता पाल / नैनीताल – नैनीताल हाईकोर्ट ने बाहरी व राज्य से आ रहे प्रवासी लोंगों का राज्य की सीमाओं पर थर्मल टेस्टिंग के साथ साथ रैपिड टेस्टिंग और एंटीजिंग टेस्टिंग की व्यवस्था करने के मामले में सुनवाई करते हुए चीफ सेकेट्री को निर्देश दिए है। कि वे समस्त जिला अधिकारियों को निर्देशित करें कि कोर्ट द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिशनरों की सहायता करें। मामले की अगली सुनवाई 18 मई की तिथि नियत की है।
आज सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर की तरफ से प्रगति रिपोर्ट पेश की गई जिसमें कहा गया कि जिला अधिकारी इसमें सहयोग नही कर रहे है। वहीं याचिकर्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि आईसीएमआर के नोटिफिकेशन दिनाक 14 मई 2020 के अनुसार 10 कम्पनियों ने रैपिट टेस्टिंग किट के निर्माण के लिए आवेदन किया है जिस पर कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार से पूछा है कि कब तक ये किट बन जाएंगी और कब तक पीड़ितों को उपलब्ध हो जायेगी 18 मई को स्थिति स्पस्ट करें। मामले की सुनवाई न्यायमुर्ति शुधांशू धुलिया व न्यायमुर्ति रविन्द्र मैठाणी की खण्डपीठ में हुई।
आपको बता दे हरिद्वार निवासी सचिदानन्द डबराल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कोरोना वायरस से बचाव के लिये घोषित लॉक डाउन से प्रभावित लोंगों की मदद करने की मांग की थी । इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि उत्तराखंड में अन्य राज्यों के करीब 40 हजार मजदूर हैं जबकि करीब 2 लाख उत्तराखंड के लोग जो अन्य राज्यों में फंसे हैं, उत्तराखंड आना चाह रहे हैं। जिन्होंने उत्तराखंड आने के लिये पंजीकरण भी कराया है। सरकार इन्हें लाने के प्रयास कर रही है । इस मामले ने हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि वह राज्य खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 व इंटर स्टेट माइग्रेंट वर्कमैन एक्ट 1979 का पालन कर पा रही है या नहीं। आज सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि बाहरी राज्यो से आने वाले प्रवासियों की जांच व देखभाल के लिए राज्य सरकार ने 49 रिलीफ कैम्प लगाए गए है जिनमे जांच की जा रही है।
























