करनाल – जिला प्रशासन ने अचानक से फिर नए कलेक्टर रेट लागू करने का निर्णय लिया है, जो आज यानि 1 अगस्त से लागू किए जाने हैं। इस बार कॉलोनियों के आवासीय क्षेत्र में अधिकतम 85, व्यावसायिक में 73 और सेक्टरों में 67 फीसदी तक कलेक्टर रेट बढ़ाया जा सकता है। यदि यह रेट लागू हो जाते हैं तो शहर में जमीन खरीदना आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगा। क्योंकि इससे पहले ही आम आदमी जमीन के दामों के कारण अपना घर लेने की दूर दूर तक सोच भी नहीं सकते l प्रॉपर्टी के जानकारों का भी यही कहना है कि प्रॉपर्टी का काम पहले ही मंदे में है। अब कलेक्टर रेट बढ़ने से और ज्यादा गिरावट आएगी। कलेक्टर रेट के साथ जमीन के रेट भी कम होने चाहिए l
यही कारण है एनसीआर और इसके साथ लगते शहरों में अब आम आदमी का घर खरीदने का सपना टूट गया है l जमीन की बात की जाए तो इस मामले में असमानता ही नज़र आती है कि किसी के पास अपना घर तक नहीं और किसी का मन कई घर, फ्लैट, प्लाट लेकर भी संतुष्टि नहीं हो पा रहा है , इसी कारण आम आदमी घर खरीदने की दौड़ से भी दूर हो गया है l
आम आदमी इस बात से हैरान है कि ऐसा क्या हो गया कि आज से 10 वर्ष पहले जमीन के रेट जो 10 हज़ार रूपये गज़ थे वो आज बढ़कर 50 हज़ार रूपये गज़ हो चुके हैं ऐसे में साधारण मिडल क्लास आम आदमी के लिए अब घर का सपना सपनों में ही कहीं खो गया है l जमीनी मामलों के जानकर भी इस बात से हैरान हैं कि आम आदमी की आमदनी तो 20 प्रतिशत बढ़ी और जमीन की कीमत 100 प्रतिशत बढ़ गई जिससे आम आदमी का घर बनाने का सपना चूर चूर हो गया क्योंकि उसके पास घर लेना तो दूर घर का खर्च ही भारी पड़ रहा है l ऐसा क्या हुआ कि आम आदमी इस होड़ से ही दूर हो गया l एक वर्ग जो पहले से ही संपन्न है वह खुद ही प्रॉपर्टी खरीदकर केवल दाम बढ़ाने के लिए जमीन पर ही अपना धन प्रदर्शन करने में लगा है l रही बात उसकी कमाई की , न कोई दलील है न कोई वकील है , केवल काले धन का ही बोलबाला है जिससे मीडियम तबके के लोगों में खासा रोष व्याप्त है l अगर अनजाने में कोई व्यक्ति कॉलोनाइजर के चंगुल में फंस भी जाता है तो उसकी उम्र भर की जोड़ी हुई पूंजी बर्बाद हो जाती है क्योंकि अवैध कालोनियों पर सरकार का बुलडोज़र चल जाता है और किसी गरीब या आम आदमी की कमाई सिस्टम की भेंट चढ़ जाती है l यहाँ बड़े छोटे सब कोलनाइज़र काला धन लगाकर जमीं को अपने वर्चस्व के लिए ही लिए जा रहे हैं l एक सर्वे के मुताबिक जितने घर एनसीआर में बन चुके हैं उनमें से 70 प्रतिशत घरों के कोई खरीदार ही नहीं हैं ,क्योंकि इतने ऊँचे दाम देने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं l यही कारण है कि कई जगह अधबनी कालोनियां ग्राहक ढूंढते ढूंढते खंडहर होने लगी हैं l कई ऐसे लोगों से जो अपना घर खरीदने की दौड़ से ही दूर हो गए हैं ,बात करने पर उनका एक ही जवाब था कई साल पहले कुछ लाख भी नहीं थे अब तो करोड़ों में है क्या करें l इन दामों की तरफ सरकार की भी कहीं नज़र नहीं है l