नई दिल्ली -हमें भारत को नम्बर एक बनाने की दिशा में काम करना है : सरसंघचालक मोहन भागवत

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नई दिल्ली – दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला “100 वर्ष की संघ यात्रा- नए क्षितिज” के पहले दिन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कार्यक्रम के नाम के पीछे की बात करते हुए कहा-  संघ को लेकर बहुत सारी चर्चाएं होती रहती हैं, लेकिन अक्सर यह महसूस किया जाता है कि उन चर्चाओं में तथ्यात्मक जानकारी कम होती है। जो जानकारी सामने आती भी है, वह प्रामाणिक नहीं होती। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि संघ के बारे में सही और तथ्य आधारित  जानकारी लोगों तक पहुँचे। किस निष्कर्ष पर पहुंचना है, यह श्रोता या पाठक का अधिकार है—संघ का उद्देश्य किसी को कन्विंस करना नहीं, बल्कि सत्य को सामने रखना है। उन्होंने कहा , “न काहू  से दोस्ती न काहू से बैर ” की भावना पर चलकर हम यहाँ तक पहुंचे हैं l उन्होंने कहा मतभेद हो तो भी मनभेद न हो हमें ऐसा विचार लेकर सबको साथ लेकर चलना चाहिए l हमारे विचार , संस्कार, आचार ठीक रहने चाहिए l उन्होंने कहा आरएसएस का सार हमारी प्रार्थना पंक्ति में निहित है जिसे हम प्रतिदिन दोहराते हैं “भारत माता की जय” l उन्होंने कहा यह हमारा देश है हमें इसकी जयजयकार करनी चाहिए और दुनिया में अपने देश को नम्बर एक बनाने की दिशा में काम करना चाहिए l
उन्होंने कहा-  100 साल चलने के बाद भी हम नए क्षितिज की बात क्यों कर रहे हैं ,क्योंकि इसके लिए हमें संगठित होकर सबको साथ लेकर चलना है l उन्होंने कहा कि संघ की 100 साल की यात्रा सिर्फ संघ को चलाने के लिए नहीं है बल्कि यह यात्रा भारत को अग्रगण्य स्थान दिलाने के लिए है  l अलग अलग विचार सुनने के बाद जो सहमति बनती है उसी से प्रगति होती है , हमें पूरे समाज को संगठित करना है l देश का जिम्मा हम सबका कर्तव्य है l देश में शाखा लगाने के बारे में उन्होंने कहा अगर किसी जगह  हिन्दू ही हों तो भी शाखा लगाना उसी तरह जरुरी है , जैसे कोई व्यक्ति हर रोज अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सैर या कोई व्यायाम करता है , ठीक उसी तरह सम्पूर्ण समाज और देश को स्वस्थ रखने के लिए शाखा लगानी जरुरी है l उन्होंने कहा , हमारे स्वयंसेवक राष्ट्र को समर्पित हैं l