फीफा वर्ल्ड कप – फुटबॉल में जनून लेकिन प्रोत्साहन की कमी

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फुटबॉल विशेष – करनाल में फुटबॉल खेलते बच्चे अपनी पसंद के स्टार खिलाडियों के फैन हैं l  कोई  क्रिस्टियानो रोनाल्डो, लियोनेल मेसी का तो कोई डिएगो माराडोना और किलियन एम्बापे के जबरदस्त फैन हैं l  इसी तरह अलग अलग देशों के मैच देखना पसंद करते हैं  पुर्तगाल, अर्जेंटीना ,फ़्रांस, ब्राज़ील जैसे l क्योंकि अपना देश भारत तो फीफा वर्ल्ड कप में कहीं दूर दूर तक नज़र नहीं आता l  साल दर साल बीत रहे हैं, लेकिन भारत फुटबॉल में जस का तस बना हुआ है l हालांकि भारत में क्रिकेट के बाद फुटबॉल दूसरा लोकप्रिय खेल माना जाता है l लेकिन भारत का ये दुर्भाग्य रहा है कि भारत ने कभी भी फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा तक नहीं लिया l 
फीफा वर्ल्ड कप 2026 संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), कनाडा और मेक्सिको की सह-मेजबानी में खेला जा रहा है और दुनिया के 48 देश फुटबॉल के इस महाकुंभ में शिरकत कर रहे हैं l हमारा देश एशिया कप ही क्वालीफाई नहीं कर पाया , उसमें भी हम 12-13 नंबर पर रहते हैं पहले यह क्लियर करें तो फीफा वर्ल्ड कप की सोचें l  एशिया की फुटबॉल में 46 देश खेलते हैं l हालांकि भारत के सुनील छेत्री जैसे महान खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फुटबॉल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है l सुनील छेत्री भारत के एक राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी हैं। वह भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के वर्तमान कप्तान हैं।  सुनील छेत्री जून 2018 में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े खिलाड़ी बने फिर भी हमारे देश की फुटबॉल को कोई संजीवनी बूटी नहीं मिली l
फुटबॉल खिलाडी भव्य , कशिश , बादल से बात की तो उन्होंने कहा कि बच्चों के माता पिता भी बच्चों का ध्यान शुरू से ही क्रिकेट की तरफ ले जाते हैं क्योंकि क्रिकेट का बाजार बहुत बड़ा है शहरों में तो ज्यादा क्रेज़ है जो अब गांवों में भी देखा जाता है l  इस हालत पर अफ़सोस होता है , जबकि फुटबॉल दुनिया में नम्बर एक पर आता है क्रिकेट में करीब 12 देश खेलें और टी20 में 20 तो उसे वर्ल्ड कप कहा जाता है जबकि फुटबॉल में बड़े बड़े और इससे दुगुने से भी ज्यादा देश खेलते हैं तो उसे सीरियस तरीके से नहीं लिया जाता l  उनका कहना है कि अगर सरकार फुटबॉल को क्रिकेट की तरह बढ़ावा दे, तो यहां इतना टैलेंट है कि यहां के खिलाड़ी भी इस फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा ले सकते हैं l
 
नेशनल फुटबॉल टीम में खेल चुकी आशा, तमन्ना ने कहा कि आज हमारे देश में फुटबॉल की स्थिति खराब है, यही नहीं, बल्कि पूरे एशिया में फुटबॉल की स्थिति अच्छी नहीं है l कहीं  इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है तो कहीं खेल का मैदान सही नहीं है, फिर खिलाडी कहाँ से तैयार होंगे l गांव के इलाकों से बच्चे फुटबॉल की प्रैक्टिस करते ज्यादा देखे जाते हैं क्योंकि वहां बच्चों में फुटबॉल के लिए बहुत जुनून और टेलेंट है l  अगर सरकार इस पर ज्यादा ध्यान दे, तो  विश्व स्तर के खिलाड़ी जरूर निकलेंगे l
 
ग्रामीण क्षेत्रों में फुटबॉल को ज्यादा पसंद किये जाने के बावजूद सुविधाओं की कमी के कारण यह ग्रामीण इलाकों तक ही सीमित रह जाता है क्योंकि शहरों में क्रिकेट का दबदबा ज्यादा है l  धैर्य , कार्तिक, यतिन सैनी, ध्रुव , हितेश फुटबॉल के  खिलाड़ियों का कहना है कि सरकार को इस पर ध्यान देकर लोकप्रिय बनाने और इन इलाकों में ज्यादा फुटबॉल एकेडमी खोलने की जरूरत है ताकि फुटबॉल को बढ़ावा देकर फुटबॉल खिलाड़ियों के हुनर ​​को निखारा जा सके l 
 
फुटबॉल के कोच पुनीत कन्यान का कहना है कि देश में फुटबॉल के टेलेंट की कमी नहीं है लेकिन सरकार की तरफ से ज्यादा ध्यान न देना और इस गेम को थर्ड केटेगरी में डाल देने से टेलेंट दब जाता है l उन्होंने 
बताया कि यहाँ 8 फुटबॉल नर्सरियाँ चल रही हैं जिनमें नरूखेड़ी और कुंजपुरा गांव मुख्य रूप से इसलिए गिने जाते हैं कि यहाँ बहुत पुराने समय से ही खिलाडियों में ज्यादा फुटबॉल के प्रति जनून है l कुंजपुरा गांव में बच्चों ने अपना क्लब भी बना रखा है जिसमें वो आपस में टीमों के साथ मैच भी कराते हैं l 
 
लेकिन बहुत दुख की बात है कि करीब 1.47  बिलियन की आबादी वाला हमारा देश वर्ल्ड कप तक नहीं पहुंच पा रहा है और दूसरी तरफ कम आबादी वाले देश आज वर्ल्ड कप में खेल रहे हैं और हम अभी तक उन्ही के मैच देखकर ताली बज़ा रहे हैं l