विलुप्त हो रहे गिद्धों की प्रजाति को बचाने के प्रयास

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कान्तापाल / नैनीताल- विलुप्त हो रहे गिद्धों को बचाने के लिए देश में गिद्ध संरक्षण के लिए बाॅम्बे नेचुरल हिस्टी सोसायटी के सहयोग से कई योजनाए संचालित है। इसके लिए हरियाणा पंचकूला के पास पिजौर और मध्यप्रदेश के मंदसौर में गिद्व प्रजनन केंद्र बनाया गया है ताकि विलुप्त होते गिद्धों को बचाया जा सके। विशेषज्ञ पी.के. गुप्ता ने बताया कि गिद्व की औसतन आयु 50 वर्ष है गिद्ध एक वर्ष में एक ही अण्डा देता है। वैज्ञानिकों ने शोध में पाया कि गिद्ध की संख्या में कमी का मुख्य कारण आॅक्सीटोसिन और डाइक्लोफेनाक नाम का इंजेक्शन है जो मवेशियाों को लगाया जाता है। मवेशी जब मरता है तो उसका मांस खाने से गिद्ध बीमार हो जाते है जिससे गिद्धों  के लीवर, गुर्दे खराब हो जाते है। जिस कारण इनके अंडे पूरी तरह से विकसित नही हो पा रहे है।

डीएफओ धर्म सिंह मीना ने बताया 1990 में गिद्धों की संख्या लगभग 4 करोड़ थी उसमें से लगभग 90 प्रतिशत गिद्धों की संख्या विलुप्त हो चुकी है गिद्धों को बचाने के लिए भारत सरकार ने 2004 में संरक्षित प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया। इससे गिद्धों  की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। राज्य सरकार और भारत सरकार के सहयोग से विलुप्त होते गिद्वों की जीवन शैली पर नजर रखी जा रही है ताकि विलुप्त होने की कगार पर पहुच चुके जीवों  को बचाया जा सकेगा।