करनाल – कोरोना वायरस के संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए देशभर में लॉकडाउन चल रहा है, इसी के साथ हरियाणा सरकार ने घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। सवाल उठता है कि हरियाणा की दो करोड़ से अधिक जनता की मास्क की जरूरत पूरी कहां से हो तो इस सवाल का जवाब करनाल की माता विद्यावन्ति और उनका परिवार है। सादे कपड़ों में करीब 76 साल पुरानी सिलाई मशीन पर हाथ चलाते देख आप सोचकर हैरान रह जाएंगे कि 92 साल की विद्यावन्ति यह सब कर कैसे लेती हैं। जब सेवाभाव दिल में हो तो फिर सारे सवाल हल हो जाते है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा सेवा भारती से जुड़े अपने परिवार में बुजुर्ग विद्यावन्ति , उनके बेटे , बहु और पोते पोतियां खाली समय का सदुपयोग जरूरतमंदों के लिए मास्क सिलकर करते हैं। 92 साल की विद्यावन्ति छड़ी के सहारे चलती हैं, आंखों से भी कम दिखाई देता है, बावजूद इसके वह तेजी से मास्क सिलती हैं।
करनाल के सदर बाजार में 92 वर्षीय माता विद्यावन्ति घर में खुद सिलाई मशीन से मास्क बनाकर लोगों को बांट रही हैं।पिछले 15 दिन में सैंकड़ों मास्क बनाकर लोगों को फ्री में बांट चुकी हैं।इस नेक काम में बजुर्ग महिला के परिवार वाले भी उनका पूरा साथ दे रहे हैं और इस बात से खुश भी है कि इस मुश्किल घड़ी में वो भी लोगों की सेवा कर पा रहे हैं। विद्यावन्ति ने बताया की वह अपने जीवन की ये तीसरी सबसे बड़ी त्रासदी देख रही हैं , इससे पहले प्लेग , फिर भारत पाक विभाजन का दर्द स्वयं भुगत चुकी है। आज जो हालात हैं उसमें मोदी सरकार जो काम कर रही है वह काबिले तारीफ है , इसके लिए वह उन्हें अपना आशीर्वाद देती हैं। लॉक डाउन करके मोदी जी ने देश को बड़े नुकसान से बच लिया है। विद्यावन्ति ने कहा मास्क बाजार से लो तो महंगे मिलते हैं। वह बताती हैं कि वे अपने समय की सबसे नम्बर एक टेलर रही हैं और सिलाई में दूर दूर तक उनका नाम था, इसके बाद उन्होंने सोचा क्यों न मास्क बनाकर लोगो को दिए जाएं। इसके बाद उन्होंने खुद मास्क सिलने शुरू किए और सेवा भारती की कर्ण शाखा के अध्यक्ष अपने बेटे कृष्ण गोपाल वत्स के माध्यम से आज सैकड़ों मास्क लोगों को बांट रही हैं। उन्होंने लोगो से अपील करते हुए कहा कि लोग अपने घरों में रहे और सरकार के नियमों का पालन करें।

बुजुर्ग महिला विद्यावन्ति रोज सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले पूजा करती हैं। फिर अपने बूढ़े हो चुके शरीर और कमजोर हो चुकी आंखों की परवाह किए बिना घंटों बैठकर उन लोगों के लिए मास्क बनाने का काम करती हैं, जो इन्हें खरीद नहीं सकते। उनके बेटे कृष्ण गोपाल ने बताया कि छड़ी के सहारे चलने वाली उनकी माता को ठीक से दिखाई नहीं देता, लेकिन इसके बावजूद उनकी ऊर्जा और जोश में कोई कमी नहीं आई है। कई घण्टे तक 76 साल पुरानी अपनी सिलाई मशीन चलाकर मास्क सिलती हैं। उन्ही की प्रेरणा से हम सब मिलकर देश सेवा में कुछ योगदान देने का प्रयास कर रहे हैं।























