करनाल – कृषि मंत्री हरियाणा सरकार ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि खेत में आग लगाना मां के गर्भ में आग लगाना है, मां की सेहत को बनाए रखना हर नागरिक का कत्र्तव्य है इसके लिए आज इस कार्यक्रम के माध्यम से सभी लोगों को संकल्प लेना होगा कि न हम कभी खेत में अवशेषों को जलाएंगे और न जलाने देंगे तभी पर्यावरण को बचाया जा सकता है।
मंत्री शुक्रवार को एनडीआरआई के मैदान में फसल अवशेष प्रबंधन पर आयोजित राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। इससे पहले मंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का विधिवत रूप से शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि धरती मां है, यह सबका पोषण करती है, धरती का स्वास्थ्य ठीक होगा तो हमें स्वच्छ भोजन मिलेगा और वातावरण भी साफ-सुथरा रहेगा। उन्होंने कहा कि धरती की सेहत जब अच्छी नहीं होगी तो उनके पुत्र व पुत्रियों की सेहत कैसी अच्छी होगी। उज्ज्वल भविष्य के लिए धरती माता का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया कि अपने खेतों में खाद व दवाईयों का कम से कम प्रयोग करें, इनके अंधाधुध प्रयोग से धरती का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। जिससे न केवल धरती की उर्वरा शक्ति कम हो रही है बल्कि लोगों में कैंसर जैसी बीमारियों से भी ग्रस्त हो रहे हैं।
उन्होंने किसानों को बधाई देते हुए कहा कि हरियाणा का किसान फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाने में अन्य प्रदेशों के किसानों से ज्यादा जागरूक हो चुका है। अब हरियाणा का किसान पराली को जलाने की बजाय खेत में ही आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से खेतों में ही नष्ट कर रहा है। इतना ही नहीं किसानों ने पराली से जैविक खाद बनाने की भी एक नई शुरूआत की है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा फसल अवशेषों को खेतों में ही नष्ट करने के लिए कृषि यंत्रों पर 221 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है और प्रदेश में 1129 सीएचसी सैंटर खोले जा चुके हैं। इन सीएचसी के माध्यम से किसानों को कृषि यंत्र खरीदने पर 80 प्रतिशत अनुदान और प्रदेश में अब तक 3489 किसानों ने व्यक्तिगत कृषि यंत्र खरीदे हैं जिन पर हरियाणा सरकार द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान दिया गया है। उन्होंने प्रदेश के किसानों से अनुरोध किया है कि वे हरियाणा सरकार की योजना का लाभ उठाएं और फसल अवशेषों को खेतों में न जलाएं बल्कि वहीं पर उनका निपटान करें। मंत्री ने सम्मेलन में उपस्थित अतिथि, अधिकारियों व किसानों को हाथ में हाथ मिलाकर संकल्प दिलाया कि वह कभी न तो पराली जलाएंगे और न ही जलाने देंगे।
कार्यक्रम में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री कर्णदेव काम्बोज ने कहा कि खेतों में पराली जलाने से पर्यावरण दूषित हो रहा है, हवा में सांस लेना मुश्किल हो रहा है जिसके कारण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, यदि पर्यावरण साफ-सुथरा होगा तो लोगों को स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। किसान भाईयों को चाहिए कि वे खेतों में पराली न जलाएं बल्कि खेत में ही उसका प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने पराली के प्रबंधन के लिए इंडियन ऑयल से एमओयू किया है, शीघ्र ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। खेतों में बचे अवशेषों से इंडियन ऑयल द्वारा तेल व अन्य पदार्थ बनाए जाएंगे। उन्होंने किसानों से कहा कि वे खेतों में अवशेष जलाने का परहेज करें।
इस अवसर पर हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा किसानों को जागरूक किया गया। अब प्रदेश के किसान पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेवारी बखूबी निभा रहे हैं। जब भी राष्ट्र की ओर से देशहित में कोई भी आह्वान किया जाता है तो सबसे पहले हरियाणा का किसान सबसे आगे आता है। पर्यावरण को बचाना भी स्वस्थ समाज के लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेवारी है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष धान का उत्पादन करीब 59 लाख टन तक पहुंच चुका है जोकि अपने आप में एक रिकार्ड है। सैटेलाइट के माध्यम से पाया गया कि पूरे प्रदेश में करीब 4800 खेतों में पराली जलाई गई जोकि कुल का 0.8 प्रतिशत है। माना जाता है कि 100 किसानों में से एक किसान ने अपने खेत में पराली जलाई परंतु हरियाणा के बारे में गलत प्रचार किया गया स्थिति कुछ और है। हरियाणा सरकार द्वारा भी अवशेष प्रबंधन के लिए सीएचसी के माध्यम से कृषि यंत्रों पर अनुदान देने की योजना बनाई गई जिसका किसानों ने भरपूर लाभ उठाया और माना जाता है कि भविष्य में प्रदेश के किसी भी खेत में फसल अवशेष नहीं जलेंगे बल्कि उनका प्रबंधन करेंगे।
सम्मेलन में कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवराज संधू ने राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन में आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन में हमें सफलता मिली है, यह एक बहुत बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा कि पहले किसान पराली अपने पास रखते थे परंतु अब किसान अधिकतर जलाने लगे हैं जिसका प्रकोप वातावरण पर पड़ता है। इस बदलाव के लिए प्रदेश के सभी किसानों ने सहयोग किया, करीब 3500 किसानों ने सीएचसी के माध्यम से कृषि यंत्र खरीदे। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन पर सहयोग किया ऐसी 139 पंचायतों को माननीय कृषि मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे प्रण ले कि कभी भी खेतों में पराली नहीं जलाएंगे।
चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय के उप-कुलपति डॉ. केपी सिंह ने कहा कि वातावरण का दूषित होना एक बहुत बड़ी चुनौती है, जब भी देश व समाज पर किसी प्रकार की चुनौती आई तो हरियाणा सामने आया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने पर्यावरण को बचाने के लिए करीब 1200 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब व राजस्थान को दिए। जिन किसानों के पास पराली के प्रबंधन के उपकरण नहीं है उनको हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ा। उन्होंने सभी से अपील की कि वे जनहित के इस कार्य में सहयोग करें। कृषि वैज्ञानिक डॉ. धर्मबीर सिंह ने भी खेत में पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में किसानों को जागरूक किया।
























