Panipat – लॉक डाउन में ट्रांसपोर्ट के कारोबार से जुड़े प्रवासी ड्राइवर गाड़ियां छोड़ अपने घर गए 

0
325

रिपोर्ट -प्रवीण भारद्वाज /पानीपत -देश भर में लोकडाउन  के चलते सभी शिक्षण संस्थानों व् औद्योगिक नगरी को भी बंद किया गया है। लॉक डाउन में एसेंशियल सर्विस को छोड़ कर सभी वाहनों को सड़क पर चलने पर रोक लगा दी गई है । ऐसे में ट्रांस्पोटरों  को बड़ा झटका लगा है। उन्हें रोजाना करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं ट्रक ड्राइवरों का दूर किसी राज्य में मौजूद परिवार भी भूखे मरने पर मजबूर हो चुका है। ड्राइवर  गाड़ियों को लावारिस  छोड़ पैदल घर निकल गए । ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान ने अन्य राज्यों के पुलिस अधिकारियों से गाड़ियों की सुरक्षा करने की अपील की है ।

पानीपत एक औद्योगिक नगरी है औद्योगिक नगरी होने के कारण पानीपत में ट्रांसपोर्ट का बहुत ज्यादा काम है। यहां से देश-विदेश में आयात निर्यात पर बहुत प्रभाव पड़ा है ट्रांसपोर्ट के माध्यम से माल पूरे देश में सप्लाई होता है। लोक डाउन के चलते पानीपत का ट्रांसपोर्ट पूरी तरह से प्रभावित हो चुका है। कोरोना वायरस महामारी के डर से जहां पूरा देश प्रदेश लोक डाउन है वही लोग डाउन का असर पानीपत की ट्रांसपोर्ट पर भी पड़ा है। वहीं पानीपत की अगर बात करें तो पानीपत के अंदर करीब आठ से 10,हजार  गाड़ियां हैं जो पानीपत में खड़ी हैं या फिर देश के अलग-अलग कोनों में गए ड्राइवर वहीं पर खड़े करके  वहां से निकल गए हैं। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट बिजनेस है उसमें 8 से 10 हजार गाड़ियां होने के चलते पानीपत में कई हज़ार लोग ट्रांसपोर्ट से अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं जो अब कठिन परिस्थिति से गुजर रहे हैं।

पानीपत ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान धर्मवीर मलिक ने बताया कि नेशनल परमिट के सभी टैक्स भर दिए गए हैं और सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनका टैक्स माफ करें। जो किश्तें पेंडिंग हैं उनको भी माफ करें ताकि जो ट्रांसपोर्ट का बिजनेस है और ट्रांसपोर्टर है वह जिंदा रहे। वहीं ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि पानीपत में करीब 50000 परिवार ऐसे हैं जो ट्रांसपोर्ट पर ही आश्रित है 10000 के करीब गाड़ियां होने के चलते एक गाड़ी पर करीब 3 आदमी जिस में ड्राइवर, कंडक्टर व् मजदूर  है इसके साथ ही मुनीम व मालिक भी ट्रांसपोर्ट पर ही आश्रित होता है। करोना के चलते यह व्यापार बिल्कुल बंद होने की कगार पर पहुंच गया। इसके साथ ही ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि करोना से जान बच जाए बस यही दुआ कर रहे हैं।   ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि जो भी ड्राइवर है वह बाहर से आए हुए व्यक्ति हैं। अप्रवासी होने के कारण उनके राशन कार्ड नहीं है उनको राशन कार्ड से कोई लेना-देना भी नहीं है. जिसके चलते उन्हें राशन भी नहीं मिलता और उनके खाने-पीने की व्यवस्था भी नहीं हो पाती। उनका राशन नहीं आता। ड्राइवर व कंडक्टर इनकी  गिनती में नहीं आते। उनके खाने-पीने की व्यवस्था भी ट्रांसपोर्टरों द्वारा करवाई जा रही है। ड्राइवर आज के समय में बहुत ही दुखी हो चुके हैं ड्राइवर तो  रास्ते में अपनी गाड़ियों को छोड़कर वहां से भाग रहे हैं क्योंकि उनके  पास पैसे ही नहीं है जो होटल है वह भी बंद पड़े हैं। उन्हें खाने पीने की चीजें भी नहीं मिल पा रही और वह भूखे मरने की कगार पर पहुंच चुके हैं। जिसके चलते गाड़ियों को छोड़कर ड्राइवर पैदल ही निकल चुके हैं अन्य किसी साधनों में बैठकर ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियां रास्ते में लावारिस छोड़कर आने को मजबूर हैं। ट्रांसपोर्ट के प्रधान धर्मवीर मलिक ने कहा कि अलग-अलग राज्यों के पुलिस कप्तानों से अपील है कि वह ट्रांसपोर्टरों के लिए उचित व्यवस्था कराएं ,ताकि जानमाल का नुकसान न हो।