नैनीताल- हाईकोर्ट में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ दायर जनहित याचिका की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई

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रिपोर्ट – कान्ता पाल /नैनीताल – उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लॉकडाउन के चलते कोरोना  महामारी के बढ़ते देखकर उत्तराखंड की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ दायर जनहित याचिका की अर्जेंट सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। जबकि कोर्ट ने इस मामले पर 10 मई की तिथि नियत की थी। आज याचिकर्ता के द्वारा कोर्ट में एक अर्जेंसी प्रार्थना पत्र देकर कोर्ट से अनुरोध किया गया था कि इस महामारी को देखते हुए इस मामले की सुनवाई त्वरित की जाय। याचिकर्ता ने शपथ पत्र के माध्यम से कहा कि वर्तमान समय मे हॉस्पिटलों में ऑक्सीजन नहीं है।रेमड़ेशिर इंजेक्शन उपलब्ध नही है। पीपीई किट उपलब्ध नहीं है। एम्बुलेंस पीड़ितों से एक किलोमीटर का किराया 5000 हजार रुपये ले रहे है।मुर्दो को जलाने के लिए शमशान घाट की कमी हो रही है और घाटों में लकड़ियो की भारी कमी है। हॉस्पिटलों में ऑक्सीजन बेड उपलब्ध नही है। होम आइसोलेशन मरीजों के लिए किसी भी तरह की सुविधाएं नही दी जा रही है। आरटीपीसीआर टेस्ट बड़ी धीमी गति से हो रही है अभी 30 हजार टेस्ट रिपोर्ट पेंडिंग पड़े हुए है।  मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने इन बिंदुओं पर सुनवाई करते हुए स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी को निर्देश दिए है कि होम आइसोलेशन पीड़ितों को त्वरित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। आरटीपीसीआर टेस्ट कराने हेतु प्राइवेट हॉस्पिटल व लेबो का नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन कराकर उनसे भी टेस्ट शीघ्र कराए जाएं।सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे अपने अपने क्षेत्रों में आशा वर्कर व एनजीओ के माध्यम से संक्रमित क्षेत्रों को  चिन्हित करें ताकि पीड़ितों को शीघ्र उपचार मिल सके।जिला अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए है कि किस हॉस्पिटल में कितने बैड खाली पड़े हुए और किस हॉस्पिटल में ऑक्सीजन उपलब्ध है उसकी जानकारी प्रत्येक दिन उपलब्ध कराएं जिससे पीड़ितों को आसानी से पता चल सके और समय पर उनको उपचार मिल सके। शमशान घाटों की व्यवस्था दुरस्त करें।स्वास्थ्य सचिव की यह भी निर्देश दिए है कि गरीब व जरुरत मन्द लोगों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना व दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत उपचार हेतु हेल्थ कार्ड शीघ्र उपलब्ध कराए जिससे वे अधिकृत हॉस्पिटलों में अपना उपचार करा सकें। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि उत्तराखंड में कोरोना से मरने वालों की दर  सभी राज्यों से ज्यादा है । देश में कोरोना से मरने वालों की दर 1.514 जबकि  उत्तराखंड में 1.542 प्रतिशत है यह एक चिंता का विषय है।आज सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। कोर्ट ने इन सभी बिंदुओं पर की गई कार्यवाही की रिपोर्ट 7 मई तक कोर्ट में पेश करने को कहा है और स्वयं भी पेश होने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 10 मई की तिथि  नियत की है।
मामले के अनुसार अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली व देहरादून निवासी सच्चिदानंद डबराल ने क्वारंटाइन सेंटरों व कोविड अस्पतालों की बदहाली और उत्तराखंड वापस लौट रहे प्रवासियों की मदद और उनके लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने को लेकर हाईकोर्ट में अलग अलग जनहित याचिका दायर की थी। पूर्व में बदहाल क्वारंटाइन सेंटरों के मामले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर माना था कि उत्तराखंड के सभी क्वारंटाइन सेंटर बदहाल स्थिति में हैं और सरकार की ओर से वहां पर प्रवासियों के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है। जिसका संज्ञान लेकर कोर्ट अस्पतालों की नियमित मॉनिटरिंग के लिये जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में जिलेवार निगरानी कमेटी  गठित करने के आदेश दिए थे  और कमेटियों से सुझाव मांगे थे।