डॉ गुरबचन फाउंडेशन फ़ॉर रिसर्च एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ने पेश की जैविक खेती की मिसाल- सुभाष चंद्र

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करनाल-  बढ़ते कीटनाशकों के दुष्प्रभाव को देखते हुए किसान आज जैविक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। किसानों को जैविक खेती की ओर ले जाने के लिए जहां एक और केंद्र सरकार प्रयासरत है वही दूसरी ओर देश के कृषि वैज्ञानिक भी इस दिशा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ऐसे ही एक कृषि वैज्ञानिक है करनाल के डॉक्टर गुरबचन सिंह जिन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग का एक ऐसा मॉडल तैयार कर दिखाया है जिसमे उन्होंने बिना जहरीले कीटनाशकों के लहलहाती फसलें पैदा कर देश के किसानों  के सामने एक मिसाल पेश की है। भारतीय कृषि वैज्ञानिक चयन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष रहे डॉक्टर गुरबचन सिंह ने काछवा के समीप करीब 5 एकड़ में जीरो बजट खेती का एक उत्तम मॉडल तैयार किया है। पूरी तरह जैविक खेती पर आधारित इस मॉडल का निरीक्षण करने के लिए रविवार को स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा के कार्यकारी वाइस चेयरमैन सुभाष चंद्र ने फार्म का दौरा किया। सुभाष चंद्र ने यहां पर परंपरागत तरीके से उगाई जा रही फसलों,  मछली फार्म, बकरी फार्म , सब्जियों और गेहूं की फसल का बारीकी से जायजा लिया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि फलों, सब्जियों में अंधाधुंध कीटनाशक के प्रयोग से मानव व मृदा स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अच्छी पैदावार के लिए मृदा उर्वरता को सामान्य बनाए रखना जरूरी है। सुभाष चन्द्र ने कहा कि डॉ गुरबचन सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के किसानों की आय दो गुणा करने के सपने को पूरा करने में दिन रात प्रयत्नशील है। वे अपने गुरबचन सिंह फाउंडेशन फॉर रिसर्च के माध्यम से किसानों को जहर मुक्त खेती के लिए शिक्षित कर रहे है , यह भी देश की एक बड़ी सेवा है। उनके द्वारा तैयार की गई नर्सरी में फल ,फूलदार व औषधीय ऑर्गेनिक खेती व उनके अनुभवों का लाभ सभी किसानों को उठाना चाहिए। सुभाष चन्द्र ने सरकार की मेरा पानी मेरा विरासत योजना के तहत जल बचाने व कम पानी में तैयार होने वाली फसलों व बीजों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने खेतों में फसलों के अवशेष प्रबंधन व उन्हें खेतों में ही इस्तेमाल कैसे करें इसे देखने इस रिसर्च सेंटर में अवश्य जाएं साथ ही उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का लाभ उठाकर अपनी आमदनी को बढ़ाए और पर्यावरण संरक्षण भी करे।
फार्म के बारे में जानकारी देते हुए डॉ गुरबचन सिंह ने कहा कि आज के समय मे जैविक खेती से किसानों की आमदनी को दोगुना ही नही बल्कि चार गुना तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नौकरी के दौरान इकठ्ठा हुए अनुभवों का लाभ किसानों को देने के लिए उन्होंने इस फार्म की स्थापना की थी। उन्हें खुशी है कि आज यह फार्म करनाल ही नहीं बल्कि हरियाणा और देशभर के किसानों के लिए एक आदर्श संस्थान बन गया है। बड़ी संख्या में किसान यहां भ्रमण करने आते है और बहुत कुछ सीखते है। उन्होंने कहा कि आज जैसे-जैसे जोत कम होती जा रही है मिश्रित खेती का की जरूरत बढ़ती जा रही है हमने 5 एकड़ में फसल विविधीकरण का एक पूरा और जीरो वेस्ट तकनीक पर आधारित है।