करनाल – बेटियों को बचाने में करनाल के बाहरी गांव को बेस्ट विलेज का अवार्ड मिला 

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करनाल –  बेहतर लिंगानुपात में वर्ष 2020-21 के लिए जिले के असंध में पडऩे वाले गांव बाहरी को बैस्ट विलेज अवार्ड के लिए चुना गया है। पिछले वर्षों की भांति हरियाणा सरकार के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत लड़कियों का लिंगानुपात सर्वाधिक होने के लिए गांव की 10वीं परीक्षा में सर्वाधिक अंक लाने वाली तीन बेटियों को, बुधवार के दिन उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। स्कीम के तहत इस उपलब्धि के लिए ऐसे गांव की 10वीं परीक्षा में प्रथम, द्वितीय व तृतीय रहने वाली बेटियों को कुल 1 लाख 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाता है अर्थात् प्रथम रही बेटी को 75 हजार रुपये, द्वितीय स्थान पर रहने वाली बेटी को 45 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान पर रहने वाली बेटी को 30 हजार रुपये नकद दिए जाते हैं। इसके लिए बाहरी गांव की अंजलि ने 90 प्रतिशत अंक लिए, दूसरी बेटी खुशी ने 84 प्रतिशत और तीसरी बेटी मधु ने 83 प्रतिशत अंक लेकर परीक्षा अच्छे नम्बरों से उत्तीर्ण की। गांव में चालू वित्त वर्ष में एक हजार लड़कों के पीछे 1305 लड़कियों का जन्म हुआ जो जिले में सर्वाधिक है।
कन्या भ्रूण हत्या रोकने को 22 जनवरी 2015 में पानीपत से शुरू हुआ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम – बता दें कि 22 जनवरी 2015 को प्रदेश के पानीपत से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम का शुभारंभ किया था ताकि समाज में बेटियों की भी बेटों के बराबर कद्र हो, उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ जीवन में उन्नति के लिए वे सभी अवसर प्रदान किए जाएं जो लड़कों को दिए जाते हैं। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हरियाणा सरकार ने बैस्ट विलेज अवार्ड की स्कीम लागू की जिसके तहत ऐसा गांव जिसमें लड़कियों की संख्या लड़कों की अपेक्षा सबसे ज्यादा हो उसका चयन किया जाता है और उसी गांव की लड़कियों को 10वीं की परीक्षा में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पाने के लिए कुल 1 लाख 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाता है। इस वर्ष का पुरस्कार बाहरी गांव को मिलने पर उपायुक्त ने तीनों बेटियों को सम्मानित करने के बाद उन्हें आगे बढऩे की प्रेरणा दी और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उपायुक्त ने तीनों बेटियों को नकद राशि के चैक दिए। उन्होंने कहा कि दूसरे गांवों को भी बाहरी गांव का अनुसरण करना चाहिए।
जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल करने का सपना संजोए तीनों बेटियों ने बताया कि वे और मेहनत कर आगे की पढ़ाई करना चाहती हैं तथा अपने माता-पिता ही नहीं गांव व जिले के नाम भी रोशन करने की ख्वाहिश दिल में है। इस संदर्भ में अंजलि ने बताया कि वह पढ़कर लिखकर बैंक अधिकारी की नौकरी करना चाहती है। दूसरी बेटी खुशी ने बताया कि उसका सपना आईएएस बनने का है जबकि तीसरी बेटी मधु ने बताया कि वह पुलिस अधिकारी बनना चाहती है। अंजलि के पिता शिवराज ने बताया कि बाहरी गांव में बेटियों के जन्म को बेटों से भी ज्यादा शुभ मानते हैं। हर घर में बेटी को पढ़ाने के ज्यादा से ज्यादा प्रयास किए जाते हैं।
गत वर्ष भी असंध का ही गांव जयसिंहपुरा बैस्ट विलेज अवार्ड हेतु चुना गया था – बता दें कि पिछले वर्ष भी असंध उपमंडल के गांव जयसिंहपुरा का चयन बैस्ट विलेज अवार्ड के लिए हुआ था। खास बात यह भी है कि असंध में ओवरआल लिंगानुपात जिले के दूसरे खंडों से कम रहा है लेकिन बैस्ट विलेज अवार्ड के लिए इस उपमंडल के गांवों ने गौरव पाया।
बेहतर लिंगानुपात में बाहरी गांव प्रथम, घरौंडा का फरीदपुर द्वितीय व तरावड़ी का गांव तखाना तृतीय स्थान पर रहा – कार्यक्रम में उपस्थित सिविल सर्जन डा. योगेश शर्मा ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के बैस्ट विलेज अवार्ड में बाहरी गांव बेहतर लिंगानुपात में 1 हजार लड़कों के पीछे लड़कियों की संख्या 1305 के साथ पहले स्थान पर रहा। इसी क्रम में घरौंडा का फरीदपुर गांव का लिंगानुपात 1 हजार लड़कों के पीछे 1259 लड़कियों का रहा और यह गांव दूसरे स्थान पर है जबकि तरावड़ी के गांव तखाना 1178 लड़कियों के जन्म के साथ तृतीय स्थान पर रहा।
पीएनडीटी व बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नोडल डा. नरेश करड़वाल – ने बताया कि पिछले एक साल से जिला में पीएनडीटी एक्ट को सख्ती से लागू किया जा रहा है। इस दौरान समय-समय पर गर्भ में भ्रण की जांच करने वाले तथाकथित समाज विरोधी तत्वों की धरपकड़ कर सफलता हासिल की है और ऐसे लोगों पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा जारी रहेगा। उन्होंने जिले की जनता से अपील कर कहा कि ऐसे लोग जो इस तरह के घिनौने काम में लगे हैं और गर्भ में लिंग की जांच कर लड़का या लड़की बताते हैं उनकी गुप्त सूचना स्वास्थ्य विभाग या उपायुक्त को दें, सूचना गुप्त रखी जाएगी और उसे नकद ईनाम भी दिया जाएगा।