दिल्ली -अराजक तत्व और अराजकता पर नकेल

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दिल्ली – पहले बने पहलवान अब बन गए जोकर l कॉकरोच जनता पार्टी को जन्म देने वाली आप पार्टी ने अपने बच्चे कॉकरोचों को बिना ट्रेनिंग के ही सड़क पर छोड़ दिया l पहले प्रदर्शन में तो सरकार ही स्थिति को अच्छी तरह समझ नहीं पाई क्योंकि सरकार ज्यादा ही आत्मविश्वास से भरी हुई थी कि जो कुछ है हम ही हैं पर आप के बच्चे  कॉकरोचों  ने सरकार को आइना दिखाया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए मज़बूर कर दिया l इससे देशवासियों का मनोबल कमजोर हुआ कि सरकार मुठीभर अराजक तत्वों से भी नहीं निबट सकी , यानि कमजोर है l इसके बाद कॉकरोचों के साथ अन्य विपक्षी पार्टियों के होंसले बुलंद हो गए l पहले सरकार के कोई सख्ती न बरतने से ये अराजक तत्व दोबारा सोशल मीडिया के जरिये और विपक्षियों के स्पोर्ट सिस्टम से आंदोलन के नाम पर अराजकता फ़ैलाने के साथ हवा बनाने लगे क्योंकि इनका असली एजेंडा चुनाव से पहले अराजकता फैलाना है l
सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली आने वाली ट्रेनों और मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह रोकने या स्टेशन बंद करने से मना किया। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होने वाले विरोध-प्रदर्शन के चलते रेल, मेट्रो और यातायात को पूरी तरह से ठप नहीं किया जा सकता है, कहा कि वे ‘मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल करने वाले तरीके न अपनाएं। अदालत ने पहले कॉकरोच और अब मक्खी का नाम दिया तो क्या अब मक्खी पार्टी बनेगी l अदालत ने सरकार  को  हथौड़ा बताया है तो क्या हथौड़ा काम करेगा l
दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से प्रदर्शन को रोकने के लिए नई दिल्ली क्षेत्र में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए हैं, कई मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी लगाई है और इंटरनेट सेवाओं को सीमित किया है जिससे हर जगह लोगों को भारी परेशानी हो रही है नौकरी ,काम पर जाने वाले लोगों को कॉकरोचों की वजह से फैली अव्यवस्था से सफर करना पड़ रहा है उनका कहना है कि इस परेशानी का हर्जाना कौन देगा l इतने लोग तो आम गली मोहल्ले के झगडे में इकट्ठा हो जाते है और जबकि कोई भी देश प्रेमी इनके साथ नहीं खड़ा है l ऐसे में देखना है कि उन रास्ते से गुजरने वाले लोगों को इन प्रदर्शनों के अड्डों से कैसे निजात मिलेगी l