इंद्री – जर्मनी के स्पीकर के पद पर मौजूद राहुल काम्बोज का गांव बदरपुर में ब्लॉक समिति की मेम्बर रजनी देवी के घर पर पहुँचने पर उनके परिवार वालो व् गांव के लोगो ने जोरदार स्वागत किया। ब्लॉक समिति की मेम्बर रजनी देवी के पति संजय काम्बोज ने बताया की राहुल काम्बोज ,मूल रूप से यमुनानगर के गांव अलाहर के रहने वाले हैं, और वो पिछले 35 साल से जर्मनी मे रह रहे हैं। तथा वहां पी डी पी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद पर जर्मनी में है । इस अवसर पर उनके साथ सुन्दरलाल, धर्मपाल,सुनील, मनोज, कंवरपाल ,रजनीदेवी आदि गांव वासी मौजूद रहे।
इंद्री के यमुना नदी क्षेत्र के साथ लगते गांव न्यू हलवाना का प्राइमरी स्कूल पिछले 2 वर्षों से बंद होने के कारण क्षेत्र के गरीब लोगों के बच्चों को शिक्षा से महरूम रहना पड़ रहा है सरकारी स्कूल को बंद कर देने से जहां गरीब आदमी परेशान हैं। वहीं कुछ लोगों ने सरकारी स्कूल के भवन पर ही बिजली विभाग ने कब्जा जमा लिया है. गांव के लोगों ने इस स्कूल को पुनः चलाने की मांग की है लेकिन प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पिछले काफी वर्षों से सरकार द्वारा प्राइमरी स्कूल चलाया जा रहा था यह गांव अधिकतर गरीब लोगों का गांव है जिस कारण गरीब जनता के बच्चे शिक्षा की सुविधा इस स्कूल के माध्यम से प्राप्त कर रहे थे ग्रामीणों का कहना है कि इस स्कूल के बंद होने के कारण बच्चों को शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस स्कूल को पुनः चालू करने की मांग की है तथा यह भी गुहार लगाई है कि यदि सरकार ने इस स्कूल को चालू नहीं किया तो बड़ा आंदोलन छेड़ने पर ग्रामीण मजबूर हो जायेगे।
गांव के सुल्तान सिंह ने कहा की इस स्कूल मैं केवल एक ही टीचर था जो जाट आरक्षण के दौरान गोलीबारी का शिकार हो गया था उसके बाद से इस स्कूल मैं कोई शिक्षक नहीं भेजा गया। जिस कारण स्कूल बंद कर दिया गया ग्रामीणों की मांग है कि इस स्कूल को दोबारा चालू कराया जाए यदि सरकार बच्चों की संख्या कम होने का बहाना बनाती है तो गांव के लोग स्कूल में अपने बच्चे भेजने की पक्की गारंटी देते
ग्रामीण दलेल का कहना है कि स्कूल के भवन पर लोगों ने अवैध रूप से कब्जा किया हुआ इस स्कूल भवन में यदि स्कूल चालू नहीं होता तो फिर इसकी जगह सरकार दूसरे संस्थानों को चालू करें।
खंड शिक्षा अधिकारी राम कुमार ने बताया कि इस गांव के स्कूल में केवल दो ही बच्चे थे जिस कारण इस स्कूल को बंद करना पड़ा उन्होंने कहा कि यदि गांव के लोग स्कूल में बच्चे भेजने को तैयार हो तो फिर इस स्कूल को दोबारा चालू किया जा सकता है


























