करनाल -नकली सोने के ठग  पिता-पुत्री  गिरफ्तार 

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करनाल -करनाल पुलिस ने नकली सोने के नाम पर चल रहे ठगी के रैकेट का खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी है  कि इस ठगी को अंजाम देने वाला कोई बाहर गैंग नहीं, बल्कि एक ही परिवार के सदस्य निकले, जिन्होंने ज्वेलरी शोरूम को अपना आसान निशाना बनाया।

डीएसपी राजीव कुमार ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस गिरोह में कुल 8 लोगों की संलिप्तता सामने आई है। पुलिस ने बहादुरगढ़ निवासी सर्वपाल सिंह और उसकी बेटी खुशी अरोड़ा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि बाकी 6 आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। सर्वपाल सिंह पर हत्या, फायरिंग, धोखाधड़ी और चोरी जैसे 50 से ज्यादा मामले दर्ज हैं l

जांच में सामने आया कि गिरोह ने कुल 66 ग्राम सोने की धोखाधड़ी की। पुलिस अब तक 56 ग्राम सोना बरामद कर चुकी है, जबकि बाकी 10 ग्राम की रकम खाते में ट्रांसफर होने की बात सामने आई है l  इस गिरोह के सदस्य  बेहद शातिर तरीके से वारदात को अंजाम देते थे । आरोपी नकली सोने की ज्वेलरी, जिसमें ऊपर असली सोने की परत चढ़ी होती थी, शोरूम में बेचते थे। बदले में असली सोना और नकदी लेकर निकल जाते थे।उदाहरण के तौर पर, 12 ग्राम की नकली अंगूठी देकर 8 ग्राम असली सोना और बाकी नकद रकम हासिल कर लेते थे। इस तरह कई बार शोरूम को चूना लगाया गया।

ओपीएस ज्वैलर्स के प्रतिनिधि यतिन गोयल की शिकायत ने पूरे मामले का पर्दाफाश किया। जब खरीदे गए सोने को पिघलाया गया, तो अंदर सस्ती धातु निकलने से हड़कंप मच गया। हैरानी की बात यह रही कि जांच मशीनें भी इस नकली सोने को पकड़ नहीं पाईं, जिससे गिरोह की चालाकी का अंदाजा लगाया जा सकता है। शुरुआत में शक शोरूम पर गया, लेकिन जब सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई तो सच्चाई सामने आ गई। अलग-अलग तारीखों को आरोपी अलग-अलग रूप में शोरूम पहुंचे और सामान्य ग्राहकों की तरह व्यवहार करते हुए ठगी को अंजाम देते रहे। किसी को भी उन पर शक नहीं हुआ।

पुलिस जांच में सामने आया है कि खुशी अरोड़ा ने अपने परिवार के साथ मिलकर करीब 10 लाख रुपए का नकली सोना शोरूम में बेचा। यह रकम और बढ़ सकती है, क्योंकि जांच अभी जारी है। दिलचस्प बात यह है कि आरोपियों के पास सोने के वैध बिल मौजूद थे। बिलिंग में कोई गड़बड़ी नहीं मिली, जिससे साफ है कि पूरी ठगी बेहद सुनियोजित तरीके से की गई थी। शिकायत के बाद पुलिस ने तुरंत कई टीमों का गठन किया और जांच सीआईए-3 को सौंपी गई। 8 अप्रैल को दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर 4 दिन के रिमांड पर लिया गया, जहां से अहम खुलासे हुए और 56 ग्राम सोना बरामद किया गया।