बेंगलुरु -फैक्ट फाइंडिंग टीम ‘सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी’ ने रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी कि दंगा पूर्व नियोजित था

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बेंगलुरु – बेंगलुरु में पिछले महीने में हुए दंगों ने पूरे शहर में ऐसा हाहाकार मचा दिया था, कि आज भी वहां के वासी बताते हुए डर जाते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में इतना भयावह शहर को कभी नहीं देखा l बेंगलुरु दंगे पर फैक्ट फाइंडिंग टीम ‘सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी’ ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा को सौंपी गयी अपनी तथ्यान्वेषी
रिपोर्ट में कहा है कि बेंगलुरु में हालिया हिंसा ‘‘पूर्व नियोजित और संगठित’’ तौर पर अंजाम दी गयी तथा ‘‘निस्संदेह यह सांप्रदायिक रूप से प्रेरित थी।’’ कमेटी ने कहा है  कि 11 अगस्त की रात दंगों के दौरान खासकर इलाके में कुछ प्रमुख हिंदुओं को निशाना बनाया गया तथा समूची घटना ‘‘राज्य के खिलाफ दंगा’’ की तरह था, जिसका मकसद राज्य के प्रति आम लोगों के भरोसे को कम करना था। ‘सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी’ जिम्मेदार नागरिकों का एक मंच है जिसका दावा है कि वह देश के नागरिकों के लोकतांत्रिक मूल्यों और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है। सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश श्रीकांत डी बबलादी की अध्यक्षता में इस तथ्य को खोजने वाली जूरी में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मदन गोपाल, सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी आर राजू सहित सेवानिवृत्त नौकरशाह, पत्रकार, अधिवक्ता, प्रोफेसर और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे l  मदन गोपाल के नेतृत्व में समिति के सदस्यों ने आज येदयुरप्पा को रिपोर्ट सौंपी l

वर्ष 2011 में शुरुआत के बाद इसने राष्ट्रीय और सामाजिक महत्व के विषयों पर विभिन्न सेमिनार, अभियान चलाए हैं। पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमान जनक पोस्ट लिखने के आरोप में बेंगलुरु के पुलाकेशी नगर में कांग्रेस के एक
विधायक के घर पर मंगलवार रात लगभग 1,000 लोगों की भीड़ ने हमला करने के साथ और दो पुलिस स्टेशनों में तोड़फोड़ की l पूर्व नियोजित और सांप्रदायिक रूप से प्रेरित था दंगा इसके चलते पुलिस ने कथित रूप से भीड़ पर गोलीबारी की, जिसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई l  रात लगभग एक बजे स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सका और 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है l

रिपोर्ट में कहा गया कि उसके अनुमान के मुताबिक हिंसा के दौरान 36 सरकारी वाहनों, करीब 300 निजी वाहनों और कई मकानों में तोड़फोड़ की गयी। कमेटी ने कहा कि 10 से 15 करोड़ रुपये नुकसान का अनुमान है। कमेटी ने कहा कि
प्राथमिकी और पीड़ितों के बयानों के आधार पर पाया गया कि स्थानीय लोग भी हिंसा में शामिल थे। स्थानीय लोग ना केवल घटना में शामिल थे बल्कि पहले से उन्हें इस बारे में पता भी था। कमेटी ने कहा, ‘‘इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के तौर पर पेश करने का प्रयास किया गया लेकिन यह निस्संदेह सांप्रदायिक रूप से प्रेरित हिंसा थी।’’

कमेटी द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि , ‘‘जिन लोगों और घरों को निशाना बनाया गया, उस आधार पर कमेटी की राय है कि दंगा का मकसद दहशत कायम करना था ताकि जनसांख्यिकी में बदलाव हो और इसे मुस्लिम बहुल क्षेत्र
बना दिया जाए। ’’ कमेटी ने कहा कि यह भी देखा जा सकता है कि इस घटना की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में कथित तौर पर एसडीपीआई और पीएफआई की संलिप्तता थी। पुलकेशीनगर के कांग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति के एक रिश्तेदार पी नवीन के सोशल मीडिया पर कथित भड़काऊ पोस्ट के बाद डी जे हल्ली और आसपास के इलाके में 11 अगस्त की रात हिंसा भड़क गयी थी। दंगाइयों ने विधायक के घर और डी जे हल्ली में एक पुलिस थाने में आग लगा दी थी। घटना के दौरान पुलिस वाहनों तथा निजी गाड़ियों में भी आग लगा दी गयी थी। समिति ने यह भी सिफारिश की कि राज्य और व्यक्तियों की संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई दंगाइयों की संपत्ति जब्त कर होनी चाहिए।