करनाल-भगवत गीता की प्रासंगिकता आज भी उतनी जितनी 5 हजार साल पहले थी : श्रील शुभग स्वामी प्रभुपाद

0
148

करनाल- अम्बेडकर चौक स्थित डॉ मंगलसेन सभागार में भारतवर्ष व देश की सनातन सांस्कृतिक की महिमा पर आधारित एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार के मुख्य अतिथि श्रील प्रभुपाद के वरिष्ठ शिष्य व इस्कॉन के गुरु श्रील सुभग स्वामी महाराज तथा राज्य के शिक्षा मंत्री कंवरपाल थे। इस सेमिनार में लगभग एक हजार से भी अधिक छात्र-छात्राएं, शिक्षक, प्राध्यापक, वैज्ञानिक ,अभिभावक व शिक्षाविदों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण बिंदु छात्रों के साथ विचार विमर्श , शिक्षाविदों के मध्य पारस्परिक संवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और 21 वीं सदी में भगवद गीता की प्रासंगिकता इत्यादि विषयों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्रील सुभग स्वामी महाराज ने भारत की पुरातन सांस्कृतिक परम्परा पर आधारित जीवन शैली व भगवद-गीता की शिक्षाओं के अनुरूप सरल जीवन व्यतीत करने को ही परम आनंद का स्रोत तथा विश्व शांति का मार्ग बताया।
उन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु श्रील प्रभुपाद का उदाहरण देते हुए कहा की श्रील प्रभुपाद ने विश्व शांति व परस्पर भाईचारे के नमूने का प्रदर्शन इस्कॉन संस्था के माध्यम से किया। जहाँ हिन्दू मुस्लिम सिख, ईसाई, देशी विदेशी सभी लोग एक साथ प्रेमपूर्वक रहतें है। उन्होंने भगवद गीता में वर्णित भक्ति-योग के सिद्धान्तों की भी व्याख्या की। छात्रो के लिए भगवद-गीता की वैज्ञानिक समझ हेतु एक वार्ता डॉ रवि प्रकाश, वैज्ञानिक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के द्वारा भी की गई। इस वाता में डॉ प्रकाश ने भगवद गीता में वर्णित योग के द्वारा मन की एकाग्रता को विकसित करने की वैज्ञानिक विधियों पर विशेष जोर दिया। डॉ प्रकाश ने कहा की भगवद-गीता की शिक्षाएं 21वीं शताब्दी में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी की आज से 5 हजार साल पहले थी। शिक्षाविदों के मध्य पारस्परिक संवाद सुदामा कृष्ण दास जो एक युवा प्रचारक हैं उनके द्वारा किया गया।
जिसमे एनडीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ सुनील कुमार ओन्टेरु, आईआईटी रूपनगर के प्रोफेसर डॉ रामजी रेपका, साांखला व जीनेसीस कोचिंग क्लासेज के निदेशक , आईआईटी बीएचयू से पीएचडी प्राप्त डॉ अंकित शर्मा सम्मिलित थे। इस अवसर पर कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।