करनाल – सेवा भारती संस्था ने पिछले सालों की तरह इस बार भी दीपावली पर घरों को स्वदेशी रोशनी से जगमग करने का अभियान शुरू किया हुआ है। सेवा भारती ने लड़ियाँ बनाने का काम 2020 में शुरू किया था l दीपावली के लिए ये स्वदेशी लड़ियाँ बनाने का काम बस्ती और गांव की महिलाओं का एक समूह करता है जिनकी संख्या 200 के करीब है l ये सेवा भारती से सामान लेकर अपने घर चली जाती हैं और घर में 2 से 5 के समूह में इन लड़ियों को बनाने का काम करती हैं, फिर बनाकर इन्हे सेवा भारती में दे दिया जाता है l इन स्वदेशी लड़ियों की खास बात यह है कि ये लड़ियाँ चाइनीज़ लड़ियों की तुलना में अच्छी क्वालिटी की तो है ही ,बाजार में बिकने वाली लड़ियों की अपेक्षा सस्ती भी हैं ।
लड़ियाँ बनाकर जमा कराने आई कविता ने बताया कि पहले हमारे पास घर में काम करने के अलावा और कोई काम नहीं था लेकिन अब घर बैठे ही काम मिल गया और अपनी कमाई भी हो गई l इन लड़ियों को हम यहाँ भी कुछ स्टेप बना सकते हैं और घर भी ले जा सकते हैं l लेकिन ज्यादा महिलाएं लड़ियाँ बनाने का सब सामान घर ही ले जाती हैं l बजीदा रोडान गांव की रहने वाली परमाली देवी का कहना है कि पिछले बार से इस बार हमारे समूह ने दुगनी लड़ियाँ बनाई हैं ,और कमाई भी दुगनी हुई है l संघोई गांव की निवासी गीता का कहना है कि हम सभी समूह की महिलाएं इकट्ठा होकर दीपावली के लिए लड़ियाँ बनाने का कार्य करती हैं l मैंने लड़ियाँ बनाने का काम पिछले साल भी किया था , तब हम 3 महिलाएं थी आज हम 6 हैं l
यहाँ आश्रम में लड़ियाँ बनाने का काम 2020 में शुरू हुआ था ,तब 10,000 लड़ियाँ बनी थी और लड़ियाँ बनाने वाली महिलाओं की संख्या 55 के करीब थी इस बार 20000 लड़ियाँ बनाने का लक्ष्य रखा है और लड़ियाँ बनाने वाली महिलाओं की संख्या 200 तक पहुंच गई है l इन रंग बिरंगी लड़ियों में तिरंगा लड़ियों की सबसे ज्यादा डिमांड है l
सेवा भारती आश्रम में लड़ियों का काम देख रहे सेवा भारती के प्रान्त कोषाध्यक्ष रोशनलाल गुप्ता ने कहा कि यहां आश्रम में आसपास की बस्ती और पास के ही कई गांवों की महिलाएं आकर लड़ियाँ बनाने का काम करती हैं l महिलाएं सामान अपने घर ले जाती है फिर बनाकर इन्हें यहाँ दे देती हैं l ये लड़ियाँ केवल निर्माण लागत पर बेचीं जा रही हैं ताकि लोग दिवाली पर स्वदेशी लड़ियाँ खरीदें और चाइनीज़ लड़ियों का बहिष्कार करें l
लड़ियों के तकनीकी काम की देखरेख कर रहे कार्यकर्ता राममेहर ने बताया कि इस बार महिलाओं ने पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं संघोई गांव के समूह की महिलाओं ने 4000 लड़ियाँ बनाकर 60000 रूपये कमाए हैं जिससे वो बहुत खुश हैं और अभी और लड़ियाँ बनाने का काम भी कर रही हैं l

























