करनाल – नवोदय विद्यालयों में फीस बढ़ोतरी के विरोध में नवोदियन छात्रों ने सौंपा ज्ञापन

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करनाल  – देशभर के नवोदय विद्यालयों में फीस बढ़ोतरी के विरोध में पूर्व छात्रों ने मोर्चा खोल दिया है। केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध जताने व फीस वृद्धि का फैसला वापिस करवाने की मांग को लेकर नवोदय के पूर्व छात्रों ने करनाल के जिला उपायुक्त श्री आदित्य दहिया के माध्यम से मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के नाम ज्ञापन सोंपा और फीस बढ़ोतरी के फैसले को वापिस लेने की मांग की। नवोदय पूर्व छात्र संघ हरियाणा के कोआर्डिनेटर लक्ष्मण श्योराण नवोदियन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ने जल्द ही ये फैसला वापिस नहीं लिया तो सभी नवोदियन देशभर में आंदोलन तेज करेंगे और दिल्ली में डेरा डालने के लिए मजबूर होंगे।

शुभम कालिया ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों का टैलेंट उभारने व शहरों की तर्ज पर अच्छी व फ्री शिक्षा प्रदान करने के लिए देशभर में नवोदय विद्यालयों की शुरुआत की गई थी। लेकिन अब केंद्र सरकार द्वारा नवोदय विद्यालयों में भी फीस लागू करने से सभी नवोदियन मे भारी रोष है। उन्होंने बताया कि देशभर में ग्रामीण परिवेश के अति पिछड़े, जरूरतमंद व होनहार छात्रों को शहरी स्तर की निशुल्क, गुणवत्तापूर्ण व बुनियादी शिक्षा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 को लागू किया था। लेकिन अब फीस वृद्धि का फैसला राष्ट्रीय एकता और बंधुत्व की भावना के न केवल विपरीत है बल्कि ग्रामीण टैलेंट को आगे लाने की दूरगामी नीति व ग्रामीण परिवेश के जरूरतमंद बच्चों के लिए बाधक है।

उन्होंने बताया कि इस समय देशभर में 591 नवोदय विद्यालय कार्यशील है जिनमे ग्रामीण क्षेत्र के 78 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे शिक्षा ग्रहण करते है। उन्होंने बताया कि ‘नवोदय विचारधारा’ जाति, धर्म, क्षेत्र इत्यादि विघटनकारी कारकों से परे है जिसका मूल प्रयोजन राष्ट्रीय एकता और बंधुत्व को बढ़ावा देना हैं। वर्तमान में ‘विद्यालय विकास निधि’ के नाम से वसूली जाने वाली फीस का निर्णय ऐसा है जो इस ‘राष्ट्रीय एकता एवं बंधुत्व’ की भावना के विपरीत है। इससे अलगाव बढेगा एवं बंधुत्व की भावना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने मांग की है केंद्र सरकार तुरन्त प्रभाव से इस फैसले को वापिस ले ताकि ग्रामीण आँचल के छात्रों की प्रतिभा को उभारने का मौका मिल सके। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने तुरन्त फैसला वापिस नहीं लिया तो वो देशभर के नवोदियन दिल्ली में डेरा डालने पर मजबूर होंगे।

उन्होंने बताया कि एनवीएस की वर्ष 2015-16 के वार्षिक प्रतिवेदन के अनुसार नवोदय विद्यालयों में ग्रामीण, एससी, एसटी, महिला का योगदान राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा है जिसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी ने भी महत्वपूर्ण माना है। नवोदय में चयन होकर प्रवेश पाना एक तरह से छात्रवृति है। नवोदियन ने कहा कि नवोदय विद्यालयों में अति पिछड़े जरूरतमंद एवं होनहार ग्रामीण परिवेश के छात्रों को शहरी स्तर की निशुल्क गुणवत्तापूर्ण बुनियादी शिक्षा उपलब्ध करवाई जाती है। इस अवसर पर शुभम कालिया,राहुल राठी, लक्ष्मण श्योराण नवोदियन, अमनपाल, सुशील, राहुल शर्मा, रवि राणा, अनिल चौहान, हनी सचदेवा, सोनू आदि मौजूद थे।