खाद्यान्न में हरियाणा देश के अन्य राज्यों में अग्रणी – मुख्यमंत्री

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करनाल – मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि देश में खाद्यान के नाते हरियाणा का नाम अग्रणीय प्रदेशों में गिना जाता है जबकि हमारी आबादी देश में केवल 2 प्रतिशत है और भौगोलिक क्षेत्र 1. 34 है। पिछले 50 सालों में किसानों के लिए जो होना चाहिए था,वो हुआ नहीं केवल किसानों को बहकाने व भ्रमित करने के लिए नारे लगाए गए,जो परिवर्तन होना चाहिए था ,वह हुआ नहीं है,परन्तु वर्तमान हरियाणा सरकार द्वारा सीमित साधनोंं में से भी कृषि के क्षेत्र में अधिक कार्य किये जा रहे है।
मुख्यमंत्री सोमवार को सीएसएसआरआई के सभागार में इंडियन काउंसिल ऑफ फूड एंड अग्रिकल्चर द्वारा आयोजित हरियाणा प्रगतिशील किसान सम्मेलन में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा किसानों की आय को बढ़ाने के लिए भरसक प्रयास किये जा रहे है। किसानों की जोत घटी है,इसके लिए बहुत ही चैलेंज है। पैदावार को कैसे बढ़ाया जाए, पानी को कैसे बचाया जाए, हरियाणा के पास स्वतंत्र रूप से पानी नहीं है। यमुना का पानी भी लगातार हरियाणा को नहीं मिलता,जिसमें से दिल्ली को कुछ पानी पीने के लिए देना पड़ता है। हरियाणा का अधिक्तर हिस्सा डार्क जोन में है,यदि पानी नहीं पहुंचाया गया तो आने वाले समय में पीने के पानी के लिए भी काफी दिक्कत आऐगी। इसके लिए वैज्ञानिक व प्रगतिशील किसानों को सांझा प्रयत्न करने की जरूरत है। वैज्ञानिकों को किसानों को जागरूक करने के लिए अधिक से अधिक सेमिनार लगाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने किसानों के जोखिम के लिए फसल बीमा योजना व भावान्तर भरपाई योजना लागू की है। उन्होंने कहा कि पानी के बचाव के लिए जल संरक्षण जरूरी है। पिछली सरकारों द्वारा भविष्य की योजना को सोचकर कोई काम नहीं किया गया यदि यह कार्य 10 साल पहले किया होता तो वर्तमान में किसानों की जरूरतों को पूरा किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि परन्तु आज हमें जरूरत है कि आने वाली पीढ़ी को रसायनिक खाद से बचाने की इससे हरियाणा और पंजाब में कैंसर के रोग बढ़ रहे है। जैविक खेती और ऑर्गेनिक फार्मिंग करनी होगी तथा कृषि आय को बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे कलस्टरों में मार्किटिंग के प्रयोग करने होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी को बचाने के लिए सूक्ष्म सिंचाई योजना पर बल देना होगा। इजराईल के लोग 30 प्रतिशत पानी से फसल कर रहे है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड के सहयोग से 14 परियोजनाओं में से 8 पर काम शुरू कर दिया गया है,जिनमें सोलर और सूक्ष्म सिंचाई शामिल है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 6 लाख टयूबवैल है। एक साल में एक टयूबवैल के लिए एक लाख रूपये की बिजली की सब्सिडी सरकार द्वारा दी जाती है यानी की 6 हजार करोड़ रूपये बिजली की सब्सिडी के रूप में देना पड़ रहा है। सोलर के प्रयोग से यदि टयूबवैल चलाए जाए तो यह सारा पैसा बच सकता है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में 500 प्रगतिशील किसान है यदि 10-10 किसानों को जागरूक करें तो आने वाले समय में सभी किसान प्रगतिशील की श्रेणी में आ सकते है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ऐसी योजना बनाएगी कि जो भी प्रगतिशील किसान आगे 10 प्रगतिशील किसान बनाएगा,उसे अवार्ड देकर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी आय को बढ़ाने के लिए परम्परागत कृषि को छो्रडक़र खुम्बी,मधुमक्खी पालन,डेयरी,मछली पालन को बढ़ावा देना चाहिए। किसानों की आय बढ़े, इसके लिए जिला स्तर पर जिला कृषि परिषद बनाई जा रही है। प्रदेश में सबसे पहले इस कार्यक्रम के द्वारा ही जिला कृषि परिषद की शुरूआत की गई।
इस मौके पर कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में हरियाणा ने जो साढ़े तीन साल में मुकाम हासिल किया है,वह देश के ही नहीं दुनिया के किसी भी राज्य ने नहीं किया। चाहे इसकी तुलना कोई भी कर सकता है। इससे पहले अपने आप को किसान के बेटे कहने वाले किसानों के साथ विकास के नाम पर आंखों में धूल झोकने का काम करते थे,परन्तु अब धूल नहीं इमेज झोंकी जाती है। हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में किसानों की दुनिया में इमेज बढ़ी है। आज किसान बागवानी,मछली पालन,पशु पालन,मधु मक्खी पालन करके अपनी आय को दिन-प्रतिदिन बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि हुड्डा के 10 साल,चौटाला के पांच साल व हमारे साढ़े तीन साल का मूल्याकंन करके देखो कि किसने कितना काम किसानों के हित में किया है। अब ओले किसान के खेत में नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के खेत में पड़ेंगे,इसके लिए उन्होंने किसानों की फसल को जोखिम रहित बनाया है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा किसान की सभी फसलों को मंडियों में खरीदा जाता है,जबकी पिछली सरकारों द्वारा कुछ चुनिंदा फसलों को ही खरीदा जाता था। उन्होंने कहा कि तीन साल पहले गन्ने का रकबा 90 हजार हेक्टेयर था,परन्तु 2 लाख हेक्टेयर है। हरियाणा गन्ना किसानों को प्रदेश में सबसे अधिक मूल्य देने वाला प्रदेश है और गन्ना किसान का किसी भी मिल के पास कोई बकाया नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का सपना है कि किसान बागवानी को बढ़ावा दें,इसके लिए 22 जिलों में उत्कृष्टता केन्द्र खोलने की योजना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 510 करोड़ रूपये की लागत से 340 गांवों को बागवानी गांव बनाया गया है। हरियाणा सरकार की मंशा है कि प्रदेश में एग्रिकल्चर,टूरिज्म विकसित हो,जिससे कोई भी व्यक्ति एक हजार से दो हजार एकड़ में सब्जी,फल का उत्पादन करें और वहीं पर उसकी बिक्री करें,लोग यहां पर खरीदने के लिए आएं। दूध के उत्पादन को बढ़ाने के लिए हरियाणा सरकार किसानों को अनुदान दे रही है। आने वाले समय में दूध का उत्पादन 3 करोड़ 60 लाख लीटर बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है जोकि अब 2 करोड़ 46 लाख लीटर है। मछली पालन के लिए भी बजट 5 करोड़ रूपये से बढ़ाकर 150 करोड़ रूपये किया गया है। हरियाणा सरकार द्वारा मछली पालकों को अब तक 70 करोड़ रूपये की सब्सिडी दी गई है।
इस मौके पर आईसीएफए के चेयरमैन एम जे खान ने कहा कि हरियाणा देश का ऐसा राज्य है,जो कृषि को बढ़ावा देने में बेहतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में हरियाणा ही एक ऐसा राज्य है,जिसका अमेरिका के एक राज्य के साथ कृषि को बढ़ावा देने के लिए एमओयू हुआ है। प्रदेश में किसानों की आय को दोगुनी करने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा बागवानी,मधुमक्खी,मछली पालन व दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए काफी प्रयत्न किये जा रहे है। हरियाणा देश का ऐसा पहला राज्य है, जहां पर जिला स्तर पर कृषि परिषद बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले एक साल में हरियाणा में एक हजार स्टार्टअप खड़े किये जाएंगे।
सीएसएसआरआई के पूर्व निदेशक डा०गुरबचन सिंह ने कहा कि किसानों को कैसे आगे बढ़ाया जाएं,किसानों की आय के स्त्रोतों को खोजा जा रहा है,इसके लिए स्टेट परिषद व जिला परिषद बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को अपने बच्चों को कृषि के साथ जोडऩे  के लिए कृषि शिक्षा के साथ जोडऩा होगा। किसानों को अपने खेतों से लगाव करना होगा और यह भी देखना होगा कि वह स्वयं कैसे उन्नत हो।
सीएसएसआरआई के निदेशक पी सी शर्मा ने कहा कि सीएसएसआरआई द्वारा किसानों की भूमि के उत्पादन को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से काम किया जा रहा है। समय-समय पर संस्थान में किसानों को मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाने के तरीकों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा 50 गांवों को गोद लिया गया है। बेगमपुर पंचायत के साथ सोयल हेल्थ कार्ड बनाने के लिए समझोता किया गया है। इस गांव की पंचायती जमीन के लिए भी सीएसएसआरआई द्वारा हेल्थ कार्ड बनाएं गए है। उन्होंने कहा कि मौसम के साथ किसानों को भी बदलना होगा,तभी किसान उन्नत होगा। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा पिछले 9 साल से पराली ना जलाने का संकल्प लिया गया है,इसके लिए उन्होंने बेगमपुर गांव के साथ भी पराली ना जलाने का एमओयू किया है।
हरियाणा किसान आयोग के चेयरमैन डा० रमेश यादव ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा किसानों को उन्नत करने के लिए हर तरीके से प्रयास किये जा रहे है। बुजुर्गो द्वारा अमानत के रूप में जो भी जमीन दी गई थी,वह बीमार हो गई है,इसको ठीक करने के लिए समय की जरूरत है,इसके लिए वैज्ञानिक भरसक प्रयास कर रहे है। उन्होंने कहा कि तरावड़ी के चावल की दुनिया में पहचान है। इस चावल की मार्किटिंग हो,इसके लिए प्रयास किये जा रहे है। इस अवसर पर 16 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री द्वारा हरियाणा कृषि पर विजन डोकोमेंट का विमोचन किया गया तथा 15 प्रगतिशील किसानों को इनोवेटिव फार्मिंग के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने इस सेमिनार के माध्यम से डाक्टर गुरबचन सिंह को करनाल डीएसी का चेयरमैन नियुक्त होने पर बधाई दी।
इस मौके पर ओएसडी अमरेन्द्र सिंह,भाजपा जिलाध्यक्ष जगमोहन आंनद,प्रदेश महामंत्री एडवोकेट वेदपाल,उपायुक्त डा०आदित्य दहिया,एसपी जे.एस रंधावा,एडीसी निशांत कुमार यादव,जिला महामंत्री योगेन्द्र राणा,शमशेर नैन,सतीश राणा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति व किसान उपस्थित थे।

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