रिपोर्ट -कांता पाल /नैनीताल -पूरी दुनियां इस समय कोरोना से जंग लड़ रही है और पूरे देश में लॉक डाउन है यानी कि हालात बेहद नाजुक हैं, पूरा देश कोरोना को हराने की जंग लड़ रहा है, तो वही गर्मियों में जंगलों में खिलने वाला राजकीय पुष्प बुरांश का फूल उत्तराखंड के वनों को अपनी खूबसूरती और लालिमा में समेटे हुए है। इन दिनों नैनीताल की वादियों में बेतहाशा बुरांश का फूल खिले हुए है।
पर्वतीय क्षेत्रों में दो से तीन हजार मीटर की उचाई वाले स्थानों पर बुरांश का वृक्ष पाया जाता है इन दिनों नैनीताल के जंगलों में यह फूल पेडों में लदा मिल जायेगा। शुगर सहित कई बीमारियों से परेशान लोगों के लिए इसका जूस रामबाण से कम नही, मन को ही नही दिल को भी सुकून देता है बुरांश गर्मियो में इससे बना शरबत लू से बचने के लिए बेहद कारगर है। इन फूलों को पेड से तोड कर चीनी की चासनी में उबालकर मिश्रण तैयार कर शरबत बनाया जाता है। बुरांश के शरबत की तासीर ठंडी होती है।गर्मियों में लू लगने से बचाने मे भी यह उपयोगी है। इसके फुलों के रस में प्रचुर मात्रा में एंटी आक्सीडेंट होता है जो टाक्सिन और हानिकारक कीटाणुओं का सफाया करने के लिए जरूरी होते है। तो आने वाले गर्मियों के मौसम में गर्मी से राहत के साथ शरीर को स्वस्थ्य रखने वाले बुरांश के शरबत और कई प्रकार की रामबाण दवा के रुप मे प्रयोग किए जाने वाले बुरांश के फूलों से बनने वाले जूस पर भी कोरोना असर पड़ना तय है। लॉक डाउन के चलते बुरांश के फूलों को तोड़ने के लिए जंगलों का रुख करने वाले और इन फूलों से जूस बनाने वाली संस्थाए बंद पड़ी है। जिस कारण ये गुणकारी फूल जंगलों में ही सड़ने लगे है।
























