रिपोर्ट -मैनपाल कश्यप /करनाल : पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (पीएचएचसी) ने न्यायाधीश बसेशर सिंह को बड़ी राहत देते हुए वर्ष 2013 में जारी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को अवैध घोषित कर रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले को सरकारी कर्मचारियों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। हाई कोर्ट के फैसला तिथि 26 मई 2026 के अनुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा 17 सितंबर 2013 को जारी आदेश में बसेशर सिंह को 50 वर्ष की आयु पूरी होने पर “जनहित” का हवाला देते हुए समय से पहले सेवा से हटाया गया था। न्यायाधीश ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि विभाग द्वारा जारी किया गया आदेश कानूनी रूप से सही नहीं था और इसमें कई त्रुटियां थीं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पंजाब सिविल सेवा नियम (खंड-2) के नियम 5.32ए(सी) तथा नियम 3.26(घ)(i) के तहत की गई कार्रवाई उचित आधारों पर नहीं थी। इसी के चलते अदालत ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को नौकरी से बाहर रहने की अवधि से सेवा मुक्त अवधि के सभी लाभ मिलेंगे ,लेकिन उसे वरिष्ठता के आधार पर सेवानिवृत्ति तक वेतन निर्धारण, पेंशन निर्धारण, पेंशन का बकाया तथा अन्य सभी परिणामी लाभ दिए जाएंगे। फैसले के साथ ही अदालत ने मामले से संबंधित अन्य लंबित दीवानी विविध एप्लीकेशनों का भी निपटारा कर दिया। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद कर्मचारी वर्ग में खुशी का माहौल है और इसे कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में अहम फैसला माना जा रहा है।























