रिपोर्ट -कांता पाल / नैनीताल -नैनीताल हाईकोर्ट ने वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने के लिए डॉक्टरों, पेरामेडिक स्टाफ की सुरक्षा व अस्पतालों में आवश्यक वस्तुओं की कमी को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कोरोना वायरस से निजात देने हेतु पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पतालों व 15 अन्य अधिकृत किये गए अस्पतालों में 7 दिन के भीतर वेंटिलेटर व आईसीयू लगाने के निर्देश दिए है । कोर्ट ने स्पस्ट तौर पर कहा है कि सरकारों को इससे अधिक समय नही दिया जा सकता है अगर इसमें कोई दिक्कत होती है तो सरकार के लिए कोर्ट के दरबाजे खुले है। कोर्ट ने मामले की मामले की भली सुनवाई हेतु 29 अप्रैल की तिथि नियत की है मामले की सुनवाई न्यायमुर्ति शुधांशू धुलिया व न्यायमुर्ति रविन्द्र मैठाणी की खण्डपीठ में हुई।
मामले के अनुसार अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि प्रदेश में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए राज्य में डॉक्टरों को उचित सुविधाएं मुहैया कराने के साथ ही उनको पूरी सुरक्षा दी जाने की मांग की है। याचिकर्ता ने प्रदेश के डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा में दी जा रही सुविधा पर सवाल खड़ा किया जिसमें उन्होंने कहा है कि सरकार ने वायरस से लड़ने के लिए डॉक्टरों व सम्बन्धित स्टाफ को सरकार ने पीपीई किट के बजाय एचआइवी किट भेज दी है जो इस महामारी से लड़ने के लिए उचित नही है। याचिकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि सरकार ने राजकीय मेडीकल कालेज शुशीला तिवारी के लिए एक हजार पीपीई किट भेजे थे जो मानकों के अनुरूप नही पाए गए । किट मुहैय्या कराने वाली कम्पनी ने मेडिकल स्टाफ के स्वाथ्य के प्रति खीलवाड़ किया है । जांच कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाय। याचिकर्ता का यह भी कहना है कि जिन अस्पतालों को अधिकृत किया गया है उनमे न तो आईसीयू है न ही वेंटिलेटर जबकि कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के लिए ये दोनो का होना अति आवश्यक है।

























